बाल संस्कार

असतो मा सद् गमय

श्रुतम्-86

असतो मा सद् गमय

यह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का ध्येय वाक्य है।
यह बृहदारण्यकोपनिषद् से लिया गया है। इसका अर्थ है कि मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
सत्य के पथ पर उन्मुख होना ही वास्तविक साधना और आध्यात्म है. लेकिन सांसारिकता से भरा हुआ मनुष्य अक्सर भौतिकता और भौतिक चीजों को एकत्र करने की जोड़-तोड़ में ही जीवन गुजार देता है और इस बात के वास्तविक मर्म को समझ नहीं पाता है।
इस मंत्र का पठन हम सभी को प्रतिदिन करना चाहिए। इससे न सिर्फ हमारे मन का अंधकार दूर होगा बल्कि हमारा मन भी स्वच्छ होगा। इसके पाठ से मन बहुत शांत हो जाता है। जिन लोगों को हमेशा किसी न किसी बात की चिंता सताती रहती है उन्हें इस मंत्र के पठन से बहुत लाभ होता है ।

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