बाल संस्कार

चार धाम – जगन्नाथपुरी

*श्रुतम्-281*

 *चार धाम*

 *जगन्नाथपुरी*

 भारत के *पूर्व दिशा में स्थित जगन्नाथ धाम* को चार वैष्णव धामों में से एक माना जाता है। भारत के चार धाम *आदि गुरु शंकराचार्य* द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं।

श्री जगन्नाथ मंदिर की चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार हैं, जो क्रमशः *पूर्व मे सिंह द्वार / मोक्ष द्वार, दक्षिण अश्व द्वार / काम द्वार, पश्चिम व्याघ्र द्वार / धर्म द्वार, उत्तर मे हाथी द्वार / कर्म द्वार* स्थापित है। मंदिर के सिंह द्वार पर कोणार्क सूर्य मंदिर से लाया *अरुण स्तंभ* स्थापित किया गया है, तथा *कोणार्क मंदिर के मुख्य विग्रह भगवान सूर्य देव* को भी यहीं स्थापित कर दिया गया है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार में *हरि एवं हर दोनों को शाश्वत मित्र* माना गया है। अतः जहाँ-जहाँ हरि निवास करते हैं वहीं आस-पास हर का भी निवास निश्चित है। ऐसे संयोग के अंतर्गत ही *भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर* को पुरी जगन्नाथ धाम के जोड़ीदार के रूप में माना गया है।

*विश्व प्रसिद्ध श्री रथ यात्रा,* जगन्नाथ धाम का सबसे प्रमुख त्योहार/मेला/उत्सव है। इस पवित्र *यात्रा का आरंभ श्री जगन्नाथ मंदिर से होता है, और मौसी माँ मंदिर होते हुए श्री गुंडिचा मंदिर* तक संपन्‍न होती है। इन तीनों मंदिरों को जोड़ती हुई तीन किलोमीटर लम्बी ग्रांडरोड है। जहाँ *भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा* दिनभर यात्रा करते हैं।

आदि गुरु शंकराचार्य के अनुसार जगन्नाथ धाम को *गोवर्धन मठ* का नाम दिया गया है। गोवर्धन मठ के अंतर्गत दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों के नाम के पीछे आरण्य नाम विशेषण लगाया जाता है। इस मठ का महावाक्य है- *प्रज्ञानं ब्रह्म* तथा इसके अंतर्गत आने वाला वेद *ऋग्वेद* को रखा गया है। गोवर्धन मठ के *प्रथम मठाधीश पद्मपाद* थे। पद्मपाद जी आदि शंकराचार्य के प्रमुख चार शिष्यों में से एक थे।

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