बाल संस्कार

 जयमल, पत्ता का बलिदान

*श्रुतम्-224*

 *जयमल, पत्ता का बलिदान*

जब प्रताप युवा हो गये। *भामाशाह, ताराचंद, झाला मानसिंह* आदि वीरो के साथ विजय स्तंभ की तलहटी में प्रताप देश व राजपूताने की स्थितियों पर विचार करते। अकबर के साम्राज्य का विस्तार हो रहा था। संपूर्ण राजपूताना उसके समक्ष झुक गया था। केवल मेवाड़ अडिग था। अकबर का आक्रमण मेवाड़ पर होने वाला था। भविष्य के संघर्ष की योजना बनने लगी।

आपसी मनमुटाव के कारण प्रताप का छोटा भाई शक्ति सिंह नाराज होकर अकबर के पास चला गया था। अकबर के मेवाड़ आक्रमण की योजना पर वह चित्तौड़ लौट आया तथा समाचार दिए। युद्ध परिषद के निर्णय के कारण महाराणा उदय सिंह सपरिवार उदयपुर चले गए। प्रताप को भी मन मसोस कर साथ में जाना पड़ा। पीछे कमान *जयमल राठौड़ व पत्ता चूँडावत* को सौंपी गई।

अक्टूबर 1567 ईस्वी में अकबर ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। 4 मास डेरा डाले रखा परंतु उसे सफलता नहीं मिली।  तथाकथित सर्वशक्तिमान बादशाह का गर्व चित्तौड़ के समक्ष चूर चूर हो गया।  उसने टोडरमल को भेज जयमल को खरीदने का प्रयास किया। किंतु देशभक्त जयमल ने प्रस्ताव ठुकरा दिया और युद्ध में मुकाबला करने को कहा।

किले में रसद खत्म हो गई तब *15 फरवरी 1568 ई.* के पावन दिन सतीत्व और हिंदू संस्कृति के मूल्यों की रक्षा करने के लिए  *पत्ता चूँडावत की पत्नी महारानी फूल कंवर* के नेतृत्व में 7000 क्षत्राणियों ने जौहर किया। यह *चित्तौड़ का तीसरा जौहर* था। उधर वीरों ने केसरिया बाना धारण कर हर हर महादेव के गगनचुम्बी उद्घोष के साथ शत्रुओं के खून से मां काली का खप्पर भरने हेतु प्रस्थान किया।

जयमल राठौड़ के घुटने पर चोट लगने के कारण वे अपने भतीजे कल्लाजी राठौड़ के कंधे पर बैठ कर युद्ध करने आए। इनके चतुर्भुज स्वरूप ने मुगल सेना पर कहर बरपा दिया। यह देख अकबर भी हतप्रभ रह गया। इन्हें रोकने का प्रयास किया गया। इनके ऊपर गौ मांस व रक्त फेंका गया।

इससे इनका बल क्षीण हो गया। पीछे से वार कर जयमल व कल्ला जी के मस्तक काट दिए। पाडन-पोल के पास जयमल जी का बलिदान हुआ तथा कल्ला जी का सिर कटने के बाद भी धड़ लड़ता रहा। अनेकों मुगलों को मारकर वे भी रणखेत रहे।

पत्ता चूँडावत की मां व पत्नी सैनिक वेश धारण कर युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुई। रामपोल पर युद्ध करते हुए पत्ता चूँडावत ने मुगल सेना को बड़ी हानि पहुंचाई। सैकड़ों मुगलों को ढेर कर युद्ध करते हुए उनका बलिदान हुआ।

*संपूर्ण परिवार को राष्ट्र,धर्म* *और संस्कृति के लिए* *समर्पित कर देने वाले ऐसे व्यक्तित्व हमारे लिए प्रेरणा के महान् स्रोत है।*

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