बाल संस्कार

देशभक्ति और पैसा

श्रुतम्-47

देशभक्ति और पैसा

प्राय: लोग समझते हैं कि पैसे से लोगों में देशभक्ति जागृत की जा सकती है; पर श्री गुरुजी (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक) इस विचार के समर्थक नहीं थे। उनका मानना था कि देशभक्ति श्रद्धा का विषय है। उसे पैसे से प्राप्त नहीं किया जा सकता।
1965 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया। युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने अपने कुछ छतरीधारी सैनिकों को पंजाब में उतार दिया। यह सूचना मिलते ही सरकार ने घोषणा की कि जो कोई उन सैनिकों को पकड़वायेगा, उसे नकद पुरस्कार दिया जायेगा।
श्री गुरुजी ने नेताओं से कहा कि यह युद्ध का समय है। इस समय प्रत्येक नागरिक में देशभक्ति की भावना हिलोरें ले रही है। अत: हमें जनता से यह आह्वान करना चाहिए कि इन दुश्मनों को पकड़ना हमारा कर्तव्य है। पैसे का लालच देकर लोगों की भावना को हल्का नहीं करना चाहिए।
यदि पैसे के लालच में लोग दुश्मन सैनिकों को पकड़ेंगे, तो हो सकता है कि पैसे के लालच में वे उन्हें छोड़ भी दें। देशभक्ति को पैसे से तोलना ठीक नहीं है।
स्वार्थ जगाकर कभी सच्चे देशभक्त तैयार नहीं किये जा सकते है।

वर्तमान में भी समाज एवं देश की समस्याओं के समाधान के नाम से अनेक तथाकथित आन्दोलन लोगों को पैसे देकर चलाये जा रहे हैं किन्तु यह तय है कि सच्चे देशभक्तों के सामने वे अधिक देर टिकने वाले नहीं हैं, इसलिए आत्मविश्वास से डटे रहे जीत निश्चित है।

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