बाल संस्कार

द्वादश ज्योतिर्लिंग – मल्लिकार्जुन

*श्रुतम्-294*

 *द्वादश ज्योतिर्लिंग*

 *2.मल्लिकार्जुन*

मल्लिकार्जुन नामक ज्योतिर्लिंग *श्री शैल पर्वत* पर स्थित है।

श्रीशैल *आंध्र प्रदेश में कर्नूल जिले* के अंतर्गत पवित्र नदी कृष्णा के तट पर है।

इसे *दक्षिण का का कैलास* भी कहा जाता है। कृष्णा नदी की जिस शाखा पर यह तीर्थ स्थित है उसे *पातालगंगा* नाम दिया गया है।

श्रीशैल पर भगवान शंकर पार्वती के साथ सदैव विराजमान रहते हैं, यह मान्यता है।

यहां *पार्वती को मल्लिका* तथा *शिव को अर्जुन* नाम दिया गया है।

पौराणिक कथा के अनुसार अपने रुष्ट *पुत्र स्वामी कार्तिकेय* को मनाने के लिए शिव-शक्ति यहां पधारे और ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए।

एक स्थानीय कथा के अनुसार एक राजकन्या अपने पिता के दुर्व्यवहार से बचने के लिए श्री शैल पर्वत पर गोप-ग्वालों के मध्य रहने लगी।

ग्वालों की एक श्यामा गाय  थी जो खूब दूध देती थी।  कुछ दिन उस गाय ने दूध देना बंद कर दिया।

जांच करने पर पता चला कि *गाय स्वेच्छा से शिखर पर स्थित शिवलिंग पर अपना दूध चढ़ा देती है* ।

तब वहां एक मंदिर का निर्माण कराया गया और शिवलिंग मल्लिकार्जुन के नाम से जगत प्रसिद्ध हुआ।

यहां पर स्थित एक शिलालेख के अनुसार स्वयं शिव एक आखेटक के रुप में पधारे तथा यहां के शांत और मनोरम वातावरण के कारण यही विराजित हो गए।

इस मंदिर को *पुरातत्ववेता डेढ़ से दो हजार वर्ष पुराना* मानते हैं ।

शिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है।

मंदिर की पश्चिम दिशा में जगदंबा का मंदिर है यहां पर पार्वती को *माधवी या भ्रमराम्बा*  के नाम से पुकारा जाता है।

*भ्रमराम्बा 51 शक्तिपीठों में से एक है।*

नवरात्र में यहां मेला लगता है। यहां पर सती की ग्रीवा का पतन हुआ था।

*महाभारत के वन पर्व, शिव पुराण तथा पद्मपुराण* में इस क्षेत्र के महात्म्य का वर्णन किया गया है।

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