बाल संस्कार

द्वादश ज्योतिर्लिंग

*श्रुतम्-292*

 *द्वादश ज्योतिर्लिंग*

अनादि काल से भारत एक इकाई के रूप में विकसित हुआ है।

यहां विकसित सभी मत-संप्रदायों के तीर्थ-स्थान संपूर्ण देश में फैले हैं।

*शैव मत* के अनुयायियों के लिए पूज्य *12 शिव मंदिरों के शिवलिंगों* को *द्वादश ज्योतिर्लिंग* नाम से अभिहित किया गया है।

यह संपूर्ण देश में फैले होने के कारण राष्ट्र की *एकात्मता के भी प्रतीक* है।

शिव पुराण में वर्णन आया है कि आशुतोष भगवान शंकर प्राणियों के कल्याण के लिए तीर्थों में वास करते हैं। जिस जिस पुण्य क्षेत्र में भक्तजनों ने उनकी अर्चना की, उसी क्षेत्र में वे आविर्भूत हुए तथा ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित हो गए।

उनमें से सर्व प्रमुख 12 की गणना द्वादश ज्योतिर्लिंगों के रूप में की जाती है जो निम्नलिखित है-

*सौराष्ट्रे सोमनाथं च*

*श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।*

*उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं परमेश्वरम्‌ ॥1॥*

*केदारं हिमवत्पृष्ठे*

*डाकियन्यां भीमशंकरम्‌।*

*वारणस्यां तु विश्वेशं*

*त्र्यम्बकं गौतमी तटे।।2।।*

*वैद्यनाथं चिताभूमौ*

*नागेशं दारुका वने।*

*सेतुबन्धे तु रामेशं*

*नागेशं दारुकावने ॥3॥*

*एतानि ज्योतिर्लिंगानि*

*सायं प्रातः पठेन्नरः।*

*सप्तजन्मकृतं पापं*

*स्मरेण विनश्यति ॥4॥*

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