बाल संस्कार

द्वादश ज्योतिर्लिं – सोमनाथ

*श्रुतम्-293*

 *द्वादश ज्योतिर्लिंग*

 *1.सोमनाथ*

 *सौराष्ट्र (काठियावाड़) क्षेत्र गुजरात* में स्थित सोमनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में *प्रथम* है।

दक्ष प्रजापति के शाप से मुक्ति के लिए चंद्रमा ने यहां तब किया तथा शाप मुक्त हो गये।

भगवान श्री कृष्ण के चरणों में यही पर जरा नामक व्याध का बाण लगा। इस प्रकार यह स्थान उनकी अंतिम लीला स्थली रहा है।

*ऋग्वेद, स्कंद पुराण, श्रीमद् भागवत, शिव पुराण, महाभारत* आदि ग्रंथों में प्रभास क्षेत्र की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है।

अति प्राचीन काल से यह स्थान पूजित रहा है। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि यहां *649 ईसा पूर्व* भव्य मंदिर था जो विदेशी समुद्री डाकुओं के अत्याचार का शिकार हुआ।

मुसलमान इतिहासकारों ने इसके वैभव का वर्णन किया है।

*इब्न नसीर* ने इसके रखरखाव तथा पूजा अर्चन के विषय में लिखा है- *10,000 गांव के जागीर* मंदिर के लिए निर्धारित है। मूर्ति के अभिषेक के लिए गंगाजल आता है।

*1000 पुजारी* पूजा करते हैं। मुख्य मंदिर *56 रत्न जड़ित खंभों* पर आधारित है।

यहां पर चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण, पूर्णिमा (श्रावण मास की) तथा शिवरात्रि के अवसरों पर वृहद मेलों का आयोजन किया जाता था। जिनमें पूरे देश से भक्तजन व्यापारी आते थे और अरब ईरान से भी व्यापारी यहां पर आते थे।

*सन् 1025 में महमूद गजनवी* की गिद्ध दृष्टि मंदिर की संपत्ति पर पड़ी और उसने इसकी पवित्रता नष्ट कर अकूत संपत्ति लूटी।

परंतु गुजरात के *महाराजा भीम ने इसका पुनर्निर्माण* करा दिया।

*सन् 1169 में राजा कुमार पाल* ने यहां एक मंदिर बनवाया।

*सिद्धराज जयसिंह* ने भी मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा में सहायता की।

परंतु मुसलमान आक्रमणकारियों के अत्याचार बंद नहीं हुए।

*सन्  1297* में अलाउद्दीन खिलजी ने सन् *1390* में मुजफ्फर शाह प्रथम ने, *1490* में मोहम्मद बेगड़ा ने, संत *1530* में मुजफ्फर शाह द्वितीय ने,

*सन् 1701* में औरंगजेब ने इस मंदिर का विध्वंस किया।

*सन् 1783 ईस्वी* में *महारानी अहिल्याबाई* ने भी यहां एक मंदिर बनवाया।  इस प्रकार दासता के कालखंड में यह अनेक बार टूटा और हर बार इसका पुनर्निर्माण कराया गया।

*अंत में भारत के स्वतंत्र हो जाने पर लौह पुरुष सरदार पटेल की पहल पर मूल ब्रह्मशीला पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिंग स्थापित कर उस की प्राण प्रतिष्ठा कराई।*

इस प्रकार सोमनाथ मंदिर फिर अपने प्राचीन गौरव के अनुकूल प्रतिष्ठित हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *