बाल संस्कार

पंच सरोवर – नारायण सरोवर

*श्रुतम्-274*

 *पंच सरोवर*

 *नारायण सरोवर*

नारायण सरोवर गुजरात के कच्छ जिले के लखपत तालुका में स्थित हिन्दुओं का एक तीर्थस्थान है। प्राचीन कोटेश्वर मन्दिर यहाँ से ४ किमी की दूरी पर है। श्रीमद्भागवत में वर्णित पाँच पवित्र सरोवरों में से एक है। ‘नारायण सरोवर’ का अर्थ है – ‘विष्णु का सरोवर’।

यहां सिंधु नदी का सागर से संगम होता है। इसी संगम के तट पर पवित्र नारायण सरोवर है।

नारायण सरोवर में कार्तिक पूर्णिमा से तीन दिन का भव्य मेला आयोजित होता है। इसमें उत्तर भारत के सभी सम्प्रदायों के साधु-संन्यासी और अन्य भक्त शामिल होते हैं।

इस पवित्र सरोवर में अनेक प्राचीन सन्त-महात्माओं के आने के प्रसंग मिलते हैं। आद्य शंकराचार्य भी यहां आए थे। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस सरोवर की चर्चा अपनी पुस्तक ‘सीयूकी’ में की है।

पवित्र नारायण सरोवर की चर्चा श्रीमद्भागवत में मिलती है। इस ग्रंथ के चतुर्थ स्कंध में कहा गया है कि महाराजा पृथु की तीसरी पीढ़ी में राजा बर्हिष हुए। उनके पुत्र दसपचेतस् ने पुत्र प्राप्ति के लिए तपस्या करने का निर्णय लिया और वे नारायण सरोवर पहुंचे। यहां भगवान रुद्र ने प्रगट होकर दसपचेतस् को रुद्रगान सुनाया और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद भी दिया।

नारायण सरोवर में श्रद्धालु अपने पितरों का श्राद्ध भी करते हैं। इसलिए पितृपक्ष में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। पवित्र नारायण सरोवर के तट पर भगवान आदिनारायण का प्राचीन और भव्य मन्दिर है। नारायण सरोवर से ४ किलोमीटर दूर कोटेश्वर शिव मन्दिर है। नारायण सरोवर में त्रिकम जी, लक्ष्मीनारायण, गोवर्धननाथ जी, द्वारकानाथ जी, आद्य नारायण, रणछोड़राय जी, लक्ष्मी जी इत्यादि के मन्दिर हैं। कच्छ के महाराओ देशल जी तृतीय की रानी ने इन मन्दिरों का निर्माण करवाया था। पूरे भारतवर्ष से श्रद्धालु यहाँ दर्शन हेतु आते हैं।

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