बाल संस्कार

पंच सरोवर-मानसरोवर

*श्रुतम्-277*

 *पंच सरोवर*

 *मानसरोवर*

मानसरोवर  लगभग *320 वर्ग किलोमीटर* के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके उत्तर में *कैलाश पर्वत* तथा पश्चिम में *राक्षसताल* है।

संस्कृत शब्द मानसरोवर, मानस तथा सरोवर को मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- *मन का सरोवर* ।

कहते हैं कि मानसरोवर वह झील है जहां माता पार्वती स्नान करती थीं और मान्यता अनुसार, वह आज भी करती हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या कि ऐसा इन्हें बनाया गया?

हालांकि पुराणों के अनुसार, समुद्र तल से 17 हजार फुट की उंचाई पर स्थित 300 फुट गहरे मीठे पानी की इस मानसरोवर झील की उत्पत्ति भगीरथ की तपस्या से भगवान शिव के प्रसन्न होने पर हुई थी।

पुराणों के अनुसार, भगवान शंकर  द्वारा प्रकट किए गए जल के वेग से जो झील बनी, कालांतर में उसी का नाम ‘मानसरोवर’ हुआ।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, परमपिता परमेश्वर के आनन्द अश्रुओं को भगवान ब्रह्मा ने अपने कमण्डल में रख लिया था तथा इस भूलोक पर ‘ *त्रिविष्टप’ (तिब्बत) स्वर्ग समान स्थल* पर ‘मानसरोवर’ की स्थापना की।

शाक्त ग्रंथ के अनुसार, देवी सती का दायां हाथ इसी स्थान पर गिरा था, जिससे यह झील तैयार हुई। इसलिए यहां एक पाषाण शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है। इसलिए इसे *51 शक्तिपीठों में से एक* माना गया है।

मान्यता है कि कोई व्यक्ति मानसरोवर में एक बार डुबकी लगा ले, तो वह *’रुद्रलोक’* पहुंच सकता है। मानसरोवर पहाड़ों से घिरी झील है, जिसे पुराणकार *’क्षीर सागर’* कहते हैं।

ऐसा माना जाता है कि *महाराज मांधाता ने मानसरोवर झील की खोज की* और कई वर्षों तक इसके किनारे तपस्या की थी, जो कि इन पर्वतों की तलहटी में स्थित है।

*यहां 2 सरोवर मुख्य हैं-* पहला, *मानसरोवर* जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, यहां पर लगभग 225 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 84 किलोमीटर परिधि तथा 150 फुट गहरी *राक्षसताल* नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। इन दो सरोवरों के *उत्तर में कैलाश पर्वत* है।

इसके दक्षिण में गुरला पर्वतमाला और गुरला शिखर है। मानसरोवर के कारण कुमाऊं की धरती पुराणों में उत्तराखंड के नाम से जानी जाती हैं।

 

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