बाल संस्कार

पत्नी के रूप में नारी शक्ति का योगदान

श्रुतम्-129

पत्नी के रूप में नारी शक्ति का योगदान

अपने पति के चरणों मे एकनिष्ठ भक्ति और पूर्ण समर्पण के कारण ही भारतीय समाज में स्त्री पति की अर्धांगिनी कहलाती है, अर्धांगिनी का अर्थ है कि पति और पत्नी अलग-अलग अपूर्ण हैं, दोनों मिलकर ही एक पूर्ण मनुष्य हैं। नारी अपने कार्य कौशल से घर में ममता की धारा प्रवाहित करने के साथ ही अपने पति की परम मित्र व सहयोगिनी होती है। भारतीय नारी का उदात्त चरित्र और पतिव्रत धर्म उसकी विशेषता रहा है। भारतीय नारियों में हजारों ऐसे उदाहरण हैं जिसमें उन्होंने एक आदर्श पत्नी के रूप में अपने संस्कारों से सत्य मार्ग पर चलते हुए अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से दुनियाभर को हतप्रभ किया है। अपने सतीत्व और धर्म के कारण सीता, सावित्री, उर्मिला, मंदोदरी, पांचाली, तारावती, अनुसूईया आदि महान नारियां भारतीय समाज का दर्पण हैं।


पश्चिमी देशों में एक ही स्त्री कई-कई पुरुषों से विवाह कर लेती हैं, वहां के परिवार बातों ही बातों में टूट बिखर जाते हैं, जहाँ पश्चिमी देशों में विवाह केवल दो शरीरों का गठबंधन और भोग का माध्यम समझा जाता है, वहीं भारतीय नारियों ने विवाह को आत्मा का बंधन और सात जन्म के बंधन के रूप में स्थापित किया है।भारतीयों नारियों ने दुनिया को सिखाया है कि पति और पत्नी दो शरीर किन्तु एक आत्मा हैं जो कि सात जन्मों तक भी अलग नहीं हो सकते, और विवाह भोग विलास का माध्यम न होकर सृष्टि रचना का धर्म है जिससे पति पत्नी का लक्ष्य सदाचारी सन्तति मानवता को समर्पित करके मोक्ष प्राप्ति ही है। ऐसी ही पतिव्रता नारियों में सावित्री का नाम आता है जिसने अपने सतीत्व और पतिव्रत धर्म की शक्ति से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण तक लौटा लिए थे। इसी प्रकार भारद्वाज मुनि की कन्या परम् सती श्रुतिवती थी जिन्होंने कठोर तपस्या के बाद इंद्र को पति के रूप में प्राप्त किया।
राक्षस राज रावण की पटरानी मंदोदरी भी लज्जा और विनय की देवी थी उन्होंने सदैव अपने पति को बुरे मार्ग पर चलने से रोका किंतु उनकी निष्ठा पति चरणों में ही रही।
सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की पत्नी तारावती ने भी त्याग और पति निष्ठा में अपने पति के वचनों को पूरा करने के लिए स्वयं को सरे बाजार में बेच दिया था।
अत्रि ऋषि की पत्नी महासती अनुसुइया भी दुनिया में धर्मनिष्ठ कर्तव्यनिष्ठ और पतिव्रत धर्म की सर्वश्रेष्ठ उपासिकाओ में विख्यात हैं। इसी तरह माता-सीता का नाम आज भी महान पतिव्रता के प्रमाण के रूप में लिया जाता है।

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