बाल संस्कार

पवित्र नदियाँ – गण्डकी नदी, ब्रह्मपुत्र

*श्रुतम्-267*

 *पवित्र नदियाँ*

 *गण्डकी नदी*

 

यह पवित्र नदी नेपाल में मुक्तिनाथ से थोड़ा आगे दामोदर कुंड से निकलती है।

इसे नारायणी तथा शालिग्रामी भी कहते हैं।

इस नदी क्षेत्र से प्राकृत और विभिन्न स्वरूप वाले शालिग्राम प्राप्त होते हैं। मुक्तिनाथ इसके तट पर स्थित प्रमुख शक्तिपीठ है। सती का गंड स्थल यही गिरा था जहां आज भव्य मंदिर है। इसी कारण इसे गंडकी के नाम से पुकारा जाता है।

यह नदी बिहार राज्य में प्रवेश करती है और गंगा में मिल जाती है।

 

*ब्रह्मपुत्र*

सप्त महानदों में ब्रह्मपुत्र प्रमुख है।

इसका उद्गम स्थान पवित्र *मानसरोवर* के समीप एक विशाल हिमानी है।  तिब्बत में  1200 किलोमीटर पूर्व की ओर बहते हुए दक्षिण पश्चिम की ओर मुड़कर भारत में प्रवेश करती है।

तिब्बती क्षेत्र में इसे *सांपों* नाम दिया गया है।

अरुणाचल असम में इसे *लोहित* कहा जाता है।

*कामाख्या शक्तिपीठ* इसके तट पर स्थित है। *अपुनर्भव, भस्मकूट,*

*उर्वशीकुंड, मणिकर्णेश्वर,* *पंडुनाथ पर्वत(मधु कैटभ का वध स्थल),* *अश्वक रत्न (कल्कि अवतार से संबंधित)* आदि प्रमुख तटवर्ती तीर्थ है।

*तेजपुर, गुवाहाटी, डिब्रूगढ़, शिवसागर* आदि समीपवर्ती नगर है।

भारत में 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तक बहने के बाद यह दक्षिण दिशा की ओर मुड़कर बांग्लादेश में पहुंचती है।

बंगाल में गंगा (पद्मा) व मेघना से मिलकर

*विश्वविख्यात सुंदरवन डेल्टा* का निर्माण करती है।

ब्रह्मपुत्र की लंबाई *2900 किलोमीटर* से कुछ अधिक ही है।

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