बाल संस्कार

पवित्र नदियाँ – नर्मदा (रेवा)

*श्रुतम्-268*

 *पवित्र नदियाँ*

*नर्मदा (रेवा)*

अमरकोश के अनुसार *रेवा* नर्मदा का ही दूसरा नाम है। रेवा को *मैकाल कन्या* के नाम से भी पुकारा जाता है। क्योंकि मैकाल से इसका एक स्रोत प्रारंभ होता है जबकि दूसरा भाग अमरकंटक से निकलता है और फिर दोनों मिलकर एक हो जाते हैं।

नर्मदा *मध्य भारत में गंगा के समान वन्दनीय* हैं। अमरकंटक से पश्चिम दिशा में बहते हुए भड़ौच के पास *खंभात की खाड़ी* के समुद्र में मिल जाती है।

नर्मदा के तट के पर असंख्य तीर्थों का प्रादुर्भाव हुआ है।

रुद्र के अंश से उत्पन्न होने के कारण यह जड़ चेतन सब को पवित्र करने में समर्थ है।

इसका नाम *रुद्र कन्या* भी है।

इसके तट पर *ओंकारेश्वर, मांधाता, शुक्लतीर्थ, भेड़ाघाट, जबलपुर, अमरकंटक, कपिलधारा* आदि पावन स्थल व नगर स्थापित है।

व्यास व शुकदेव ने  *बरकेल* नामक स्थान पर आकर नर्मदा में स्नान किया।

बरकेल आज भी *सामवेदी ब्राह्मणों* के लिए प्रसिद्ध है। यहीं पर व्यास जी का मंदिर व शुकदेव महादेव के मंदिर बने हैं।

*सती अनुसूया का मंदिर* भी पास ही बना है।

*सरदार सरोवर बांध* भी इसी पर बनाया गया है।

नर्मदा की कुल लंबाई *1300 किलोमीटर* है।

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