बाल संस्कार

बुढ़ापा

..बुढापा..

किसी ने द्वार खटखटाया
मैं लपककर आया
जैसे ही दरवाजा खोला
तो सामने बुढ़ापा खड़ा था
भीतर आने के लिए
जिद पर अड़ा था..

मैंने कहा –
“नहीं भाई!
अभी नहीं
अभी तो यह घर मेरा है..”

वह हँसा और
बोला-

‘यह घर न तेरा है न मेरा है
चिड़िया रैन बसेरा है..’

मैंने कहा –
“.. अभी तो कुछ दिन रहने दे,
अभी तक
अपने ही लिए जिया हूँ ..
अब अकल आई है
तो कुछ दिन
दूसरों के लिए भी जीने दे..”

बुढ़ापा बोला –
“अगर ऐसी बात है
तो चिंता मत कर..
उम्र भले ही तेरी बढ़ेगी
मगर बुढ़ापा नहीं आएगा,
तू जब तक दूसरों के लिए जिएगा
खुद को जवान ही पाएगा..”

बढ़ती उम्र का लुत्फ़ उठाइये…

🌹🌹🌹🌹

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