बाल संस्कार

बैल और गधा

दो पण्डित एक गृहस्थ के घर अतिथि हुए। एक विद्वान स्नान गृह में गये तो। गृहस्थ ने दूसरे से उनके बारे में पूछा। वह कहने लगे, वह तो बिल्कुल बैल है। पहला बाहर आ गया और दूसरा स्नान करने गया तो गृहस्थ ने उससे भी वही बात पूछी ।। दूसरा विद्वान बोला- वह तो पूरा गधा है। दोनों भोजन के लिए बैठे तो गृहस्थ एक के आगे भूसा और दूसरे के आगे घास पटक कर बोला लीजिये महाराज बैल और गधे का भोजन हाजिर है। यह सुनकर दोनों बड़े लज्जित हुए।
एक दूसरे से ईर्ष्या और निन्दा अमानवीयता का ही घोतक है।

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