बाल संस्कार

भारतरत्न बाबासाहेब  डॉ भीमराव अम्बेडकर और उनकी राष्ट्र- दृष्टि

*श्रुतम्-156*

*भाग-1*

*भारतरत्न बाबासाहेब  डॉ भीमराव अम्बेडकर और उनकी राष्ट्र- दृष्टि’*

डॉ. अम्बेडकर को भारत का सामान्य जन सिर्फ संविधान निर्माता के रूप में जानता है तथा उनकी विचारधारा को लेकर भी कई भ्रांतियां फैलाई गई हैं। इस कारण भारत के निर्माण में उनकी बहुआयामी प्रतिभा और उनकी दूर दृष्टि के अहम योगदान का पक्ष प्रकाश में नहीं आ सका।

अर्थशास्त्र पर उनके मौलिक और प्रभावी अध्ययन को कभी राष्ट्र के समक्ष नहीं रखा गया। उनकी दृष्टि में राष्ट्र ही प्रमुख था। वे सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय एकता के पक्षधर थे, न कि जातिवाद के।

डॉ. अम्बेडकर ने पाकिस्तान बनने के विषय में मुसलमानों की जनसंख्या के सम्पूर्ण स्थानांतरण की नितांत आवश्यकता बताई थी। उनके द्वारा राष्ट्र की एकता के लिए तमाम भाषाओं के सम्मान के साथ-साथ एक राष्ट्रभाषा की वकालत करना, आर्य सभ्यता के विदेशी होने की ब्रिटिश शासन की साजिश को भांप लेना, राजनीतिक सुधारों के आधार के रूप में सामाजिक सुधारों की अनिवार्यता बताना, स्वतंत्रता-समानता और बंधुत्व, तीनों बातें समाज के प्रत्येक वर्ग में होने से ही आजादी का सही अर्थ में आनंद आना उन्हें राष्ट्रवादियों, राष्ट्रभक्तों और भारतीय समाज सुधारकों की सूची में अग्रणी रखता है।

 

 

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