बाल संस्कार

भारत गौरव गान भाग 2

भारत गौरव गान भाग 2 || विश्वगुरु भारत || आर्यत्व,साहित्य,जगतगुरु ||

4 – प्रकृति

प्रथम जहां पर प्रकृति-नटी की रूप-छाटाप्रिय गई छलक।

प्रथम जहां रवि उदित हुआ ले कीर्ण, रेशमी चमक-दमक।।

प्रथम जहां के नभ-मण्डल पर शीतल शशि भी गई चमक।

प्रथम जहां के वन-उपवन में स्वर्ण चन्द्रिका गई छटक।।

प्रथम जहां के नील-गगन में तारा गण की हुई झलक।

प्रथम जहां पर आदि सृष्टि में जीवों ने खोला स्वपलक।।

प्रथम जहां के बाग-विपिन में चिडियों की थी हुई चहक।

प्रथम जहां की रम्य-वाटिका नव पुष्पों से गई महक।।

प्रथम जहां पर उपजा स्वादु अन्न सकल रस-खान।।

है भूमण्डल में भारत देश महान।।

 

5 – आर्यत्व

आर्यावर्त व भारतवर्ष सुनाम पुरातन गौरववान।

यवनों द्वारा पाया था उपनाम हिन्द औ हिन्दोस्तान।।

प्रभु से पाकर शुचि शाश्वत प्रिय पूरित वैदिक ज्ञान-विज्ञान।

प्रथम जहां पर आर्य जाति ने किया सकल निज अभ्युत्थान।।

आर्य उन्हें कहते हैं जो हैं धार्मिक, सभ्य, वीर, विद्वान।

आर्य सभ्यता, वैदिक संस्कृति है मानवता का सोपान।।

सत्य, अहिंसा, शांति, एकता है आर्यों का सुमधुर गान।

विश्व बन्धु औ पंचशील की जिसने छेड़ी वैदिक तान।।

और जहां से फैली जग में आर्यों की सन्तान।

है भूमण्डल में भारत देश महान।।

 

6-साहित्य

जहां ईश्वरी-ज्ञान वेद हैं ऋग, यजु, साम, अथर्व महान।

छै दर्शन छै शास्त्र सुब्राह्मण, आरण्य गृह सूत्रादि बखान।।

निरुक्त, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छन्द ज्ञान सोपान।

सांख्य, योग, वैशेषिक, न्याय, सुमीमांसा, वेदान्त विज्ञान।।

ईश, केन, कठ, प्रश्र, आदि हैं, उपनिषदें आध्यात्मिक-प्राण।

रामायण, महाभारत, गीता, ग्रन्थ-साहब काव्य पुराण।।

शतपथ, गौपथ, अष्टाध्याय, मनुस्मृति है विद्या गुन-धान।

अर्थ, धनुर्गन्धर्व सु आयुर्वेद व वैदिक सम्पति-ज्ञान।।

हैं सत्यार्थ प्रकाश, भाग्य श्रुति, संस्कार विधि गुन-खान।

है भूमण्डल में भारत देश महान।।

 

7 – जगतगुरु

प्रथम भारती ने ही जग को बतलाया शुभ चाल चलन।

जगत दिगम्बर को सिखलाया करना पट-परिधान स्वतन।।

औ सिखलाया निषेध करना भ्रात-बहन में ब्याह लगन।

मांस मीन भक्षण तज, सिखलाया करना सात्विक भोजन।।

सिखलाया गढ़, नगर बसाना और बनाना भव्य-भवन।

सिखलाया शुभ ज्ञान, विज्ञान, कला कौशल भगवान भजन।।

सिखाये वैद्यक, ज्योतिष, गणित, गगन-वाणी का ज्ञान गहन।

और सिखाई मानस-भाषा करके संस्कृत पाठ-पठन।।

प्रथम जगत गुरु भारत ने रचा जलयान विमान।

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