बाल संस्कार

*भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जन अभियान *

*श्रुतम्-171*

*भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जन अभियान *

भूमि सुपोषण एवं संरक्षण हेतु राष्ट्रीय जन अभियान का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर, १३ अप्रैल, २०२१ को हुआ।

जन अभियान को कृषि एवं पर्यावरण क्षेत्र में कार्यरत 33 संस्थाओं ने संकल्पित किया है। *अभियान का मुख्य उद्देश्य भारतीय कृषि चिंतन, भूमि सुपोषण एवं संरक्षण इन संकल्पनाओं को कृषि क्षेत्र में पुनः स्थापित करना है।*

जन अभियान प्राधान्यातः भूमि सुपोषण, जन जागरण एवं भारतीय कृषि चिंतन एवं भूमि सुपोषण को बढ़ावा देने संबंधित कार्यक्रम रहेंगे।

अभियान के प्रथम चरण की कालावधि तीन माह यानि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, 24 जुलाई 2021 तक होगी। आधुनिक कृषि में भूमि का स्थान मात्र एक आर्थिक स्रोत है। परिणामतः, इस आधुनिक कालखंड में हमने भूमि का सतत शोषण किया है। बहुत कम मात्रा में हमने भूमि से निकाले पोषण तत्वों का पुनः भरण किया है। वर्तमान में हमारे देश के 96.40 दशलक्ष हेक्टेयर भूमि अवनत है। यह हमारे कुल भौगोलिक क्षेत्र का 30 प्रतिशत ।

माता भूमि: पुत्रों अहम् पृथिव्या । विगत कई सदियों से हम भारतीयों का प्रकृति से बहुत गहरा सम्बन्ध रहा है | क्या हमने कभी सोचा है कि पृथ्वी हमारी माता है? यदि नहीं तो यही वह समय है, जब हमें अपने विचारों में आमूल बदलाव की आवश्यकता है | अथर्ववेद के भूमि सूक्त में वर्णित इस श्लोक में हम भूमि के पुत्र हैं | भारतीय संस्कृति में इस मान्यता को यथार्थ रूप में वर्णित किया गया है | एक पुत्र की भांति ही हमें भी हमारी धरती माता की सेवा करनी चाहिए, और यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है |

*तो आइये ‘भूमि सुपोषण एवं संरक्षण’ के इस प्रयास में शाश्वत विकास के लिये राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें |*

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *