बाल संस्कार

माता के रूप में नारी शक्ति का योगदान

श्रुतम्-128

माता के रूप में नारी शक्ति का योगदान

भारतीय संस्कृति और भारत की अस्मिता की रक्षा करके भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान देने वाली माताओं में सतयुग से लेकर आज तक अनेक भारतीय नारियों का नाम आता है।
माता कौशल्या, माता कुंती, माता यशोदा, माता देवकी, जीजाबाई, पन्नाधाय, माता पद्मावती, गान्धारी, मदालसा, माता विदुला से लेकर आज भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की माता जी तक ने अपने कोख से महान सपूत पैदा करके उन्हें भारतीय संस्कृति का पाठ पढ़ा कर उनके अंदर तपस्या और सेवा की शिक्षा देकर भारतीय संस्कृति को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में अपना महान योगदान दिया है।
माता विदुला का नाम इसी रूप में लिया जाता है, माता कुंती ने अपने पुत्रों को माता विदुला द्वारा अपने पुत्र संजय को धर्मयुद्ध के लिए प्रेरणा देने वाली कथा सुनाकर ही युद्ध की प्रेरणा दी थी।
हिंदवी साम्राज्य की स्थापना करके विदेशी आक्रांताओं को धूलधूसरित करने वाले वीर शिवाजी की माता जीजाबाई ने भी अपना मातृत्व धर्म निभाते हुए अपने बेटे शिवाजी को स्वदेश प्रेम के संस्कार दिए थे।माता जीजाबाई ने अनेक कष्ट सहे अपने पति से वियोग का दुख भी झेला किंतु शिवाजी के लालन-पालन में कोई कमी नहीं आने दी। वे सदा ही अपने पुत्र को वीर व धर्म परायण बनाने का पाठ पढ़ाती थी वह पुत्र को महाभारत और रामायण आदि ग्रंथों की प्रेरक गाथा सुनाती ताकि पुत्र को वीरोचित संस्कार मिल सकें। उनकी वर्षों की तपस्या फलीभूत हुई और महाराज शिवाजी हिंदू राज्य की स्थापना करने में सफल हुए यदि उन्हें जीजाबाई जैसी माँ ना मिली होती तो वे कदाचित यह सब ना कर पाते। महाराज ऋतुध्वज की पत्नी मदालसा भी एक विदुषी माता थी उनके चार पुत्र थे उन्होंने अपने तीन पुत्रों को मोहमाया से भरे संसार की निस्सारता से परिचय करा कर सन्यासी बना दिया और अपने पति की चिंता पर अपने एक पुत्र अलर्क को राजनीति की शिक्षा देकर धर्मनिष्ठ राजा बनाया। माता कौशल्या ने श्री राम जैसे पुत्र को अवतरित करके भारतीय संस्कृति को दुनिया में सिरमौर बना दिया माता कौशल्या ना होती तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम न मिलते।
माता देवकी ने सोलह कलाओं से पूर्ण श्रीकृष्ण को अवतरित करके भारतीय संस्कृति के लिए माँ के रूप में महान योगदान दिया है। वास्तव में राम और कृष्ण भारतीय संस्कृति के प्राण हैं। मां यशोदा का भी धाय माँ के रूप में कृष्ण का पालन-पोषण करना और कृष्ण के प्रति अनंत प्रेम और समर्पण किसी से छुपा नहीं है। स्वामी दयानंद की माता यशोदाबाई, स्वामी विवेकानंद की माता भुवनेश्वरी देवी, लव-कुश की माता सीता, परम पूजनीय केशव राव बलिराम हेडगेवार की माता रेवती बाई, परम पूजनीय गुरु जी की माता लक्ष्मीबाई, नरेंद्र मोदी जी की माताजी हीराबेन आदि ने इस भारत को महान वीर और धर्मनिष्ठ पुत्र देकर भारतीय संस्कृति और भारतीय सनातन मूल्यों के सरंक्षण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। इन दिव्य माताओं की शिक्षा प्राप्त करके इनके पुत्रों ने ना केवल भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अपना अमूल्य योगदान दिया है बल्कि भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन दर्शन से पूरी दुनिया को परिचित भी कराया है।

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