बाल संस्कार

 मातृशक्ति: केरल में ममता भरी छांव

*श्रुतम्-218*

 *मातृशक्ति: केरल में ममता भरी छांव*

समाज की सेवा ही सही मायने में परमेश्वर की पूजा है। यह भावना मन में रखकर समाज में निराश्रित लड़कियों और महिलाओं के सिर पर ममता भरी छांव धरने का महत्वपूर्ण काम *मातृशक्ति* नामक गैर सरकारी संस्था कर रही है। संस्था पिछले डेढ़ दशक से यह कार्य कर रही है। केरल के एर्नाकुलम जिले के अलुवा गांव में पेरियार नदी के किनारे मातृशक्ति का यह सिर्फ लड़कियों और महिलाओं के लिए बना आश्रम है।

सेवा भारती के एक प्रकल्प के स्वरूप में शुरू किए गए इस मातृशक्ति केंद्र में आज 50 से अधिक निराश्रित लड़कियों और महिलाओं को आश्रय दिया गया है। समाज के उच्च शिक्षित वर्ग से समाज कार्य की और स्वयं प्रेरणा से आकृष्ट हुए अग्रणी समाज सेवक और प्रशिक्षित कर्मचारी वर्ग इन लड़कियों को उचित शिक्षा और सुरक्षा प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है।

आज देश में लड़कियों के प्रति जो नकारात्मक रवैया का निर्माण हुआ है, उसके चलते निराश्रित बच्चियों की एक बड़ी समस्या खड़ी हो रही है। बेटा प्राप्ति के दुराग्रह के कारण प्रायः कई बेटियों को उनका जन्म होते ही उनके मां-बाप उनसे ममता का आंचल छीन लेते हैं। इन बच्चियों का प्यार से पालन करने की जिम्मेदारी मातृशक्ति निभा रही है। उसी प्रकार विविध कारणों से मां,बाप, पति या अन्य रिश्तेदारों से अलग रह रही महिलाओं को भी यहां आश्रय दिया जाता है। यहां लाई गई अनाथ बच्चियों को उचित भोजन व दवाइयां उपलब्ध कराई जाती है। उनका ठीक से लालन-पालन किया जाता है। उनका समय समय पर मेडिकल चेकअप किया जाता है। स्कूल में जाने योग्य लड़कियों को उचित शिक्षा प्रदान की जाती है। उनका प्रतिष्ठित स्कूलों और महाविद्यालयों में दाखिला कराया जाता है।

आज यहां की तकरीबन 30 लड़कियां विभिन्न महाविद्यालयों में उचित शिक्षा ले रही है। उन्हें बीच-बीच में शैक्षणिक भ्रमण पर सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों में, स्पर्धाओं में सहभागी होने के लिए राज्य के विभिन्न शहरों में भी भेजा जाता है। इससे उन्हें *समाज से प्रशंसा तो मिलती ही है, साथ ही किसी समय समाज, कुटुंब से दुत्कारी गई इन लड़कियों में समाज के प्रति कृतज्ञता का भाव निर्मित होने में भी मदद मिलती है।*

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