बाल संस्कार

मेवाड़ स्वतंत्र- प्रतिज्ञा पूर्ण

*श्रुतम्-230*

 *मेवाड़ स्वतंत्र- प्रतिज्ञा पूर्ण*

अकबर ने प्रताप को पकड़ने के लिए *सातवाँ आक्रमण जगन्नाथ कछवाहा के नेतृत्व में* किया। वह भी असफल होकर लौट गया। प्रताप ने लगातार मुगल थानों पर आक्रमण कर मुगलों को मेवाड़ से भगा दिया। *अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करते हुए मेवाड़ के सभी ठिकानों को स्वतंत्र करा लिया।* चित्तौड़ व मांडलगढ़ पर प्रताप के छोटे भाई सगर का राज्य होने के कारण उसे छोड़ दिया गया।

सात भीषण आक्रमण करने के बाद, असफल हो अकबर शांत बैठ गया। प्रताप ने अब *चावंड* को अपनी राजधानी बना कर *1585 ई. से पुनर्निर्माण* का नया अध्याय प्रारंभ किया। *कृषि, सिंचाई, सड़क, सुरक्षा, सैन्य पुनर्गठन* किया गया। जहां उस काल में अनेक राजा व मुगल सम्राट चापलूसी भरे ग्रंथ लिखवाते थे वहीं प्रताप ने स्वयं अनामिक रहकर लोक कल्याणकारी ग्रंथ लिखवाए। *चक्रपाणि मिश्र द्वारा विश्वबल्लभ ग्रन्थ  (कृषि विकास हेतु) की रचना करवाई।*

*1585 ईस्वी से 1597 ई. तक 12 वर्षों का यह कालखंड वैभवकाल* के रूप में स्मरण किया जाना चाहिए। इस समय अनेक मंदिरों, राजभवनों, किलों आदि का निर्माण करवाया गया। प्रताप युद्धकाल व शांतिकाल दोनों में ही महानायक के रूप में प्रमाणित हुए। अब अंतिम समय आ गया। एक बघेरा गायों को खा जाता था। सैनिक उसे पकड़ नहीं पा रहे थे। तब प्रताप ने उसे पकड़कर मारा। इस संघर्ष के कारण उनकी आंतें खींच गई। वे अस्वस्थ हो गए। इस बीमारी की अवस्था में भी भी मेवाड़ के भविष्य को लेकर चिंतित थे। सभी सामन्तों व युवराज अमर सिंह को बुलाकर एकलिंगजी व दीपज्योति को साक्षी मान, मेवाड़ की रक्षा का संकल्प कराया। इस प्रकार उन्होंने अपना जीवन लक्ष्य पूर्ण किया।

अपने जीवन के 57 बसंत पूर्ण कर *माघ शुक्ला एकादशी तदनुसार 19 जनवरी 1597 ईस्वी को चावंड में अपनी इहलीला* पूर्ण की। प्रताप के देहावसान की खबर सुनकर सर्वत्र शोक की लहर फैल गई। मेवाड़ के कोने-कोने से सामान्य जन से लगाकर प्रमुख लोग चावंड में एकत्रित हो गए।

 *अपना सब कुछ लुटा दिया,*

 *जननी पद नेह लगाकर।*

 *कलित कीर्ति फैला दी है,*

*निद्रित मेवाड़ जगा कर*

*जग वैभव उत्सर्ग किया,*

 *भारत का वीर कहा कर।*

 *माता-मुख लाली प्रताप ने,*

*रख ली लहू बहा कर।*

*भीषण प्रण किया रक्त से,*

*समर सिंधु भर डाला।*

*ले नंगी तलवार बढ़ा*

*सब कुछ स्वाहा कर डाला।*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *