बाल संस्कार

*राष्ट्रभाव से ओतप्रोत विद्यार्थी केशव का जीवन*

*श्रुतम्-147*

*राष्ट्रभाव से ओतप्रोत विद्यार्थी केशव का जीवन*

विद्यार्थी जीवन से ही केशव के मन पर मस्तिष्क पर राष्ट्रवाद ने गहरी जड़े जमा ली थी । नागपुर में सीताबर्डी के किले पर यूनियन जैक दिनभर फहरता दिखता था । उस झंडे को कैसे हटाया जाए इस पर केशव ने कई दिनों तक चिंतन किया । अंत में अपने साथियों को लेकर वझे गुरुजी की अनुपस्थिति में उनके घर से ही सुरंग बनाने का का निर्णय हुआ । और सभी साथी सुरंग बनाने के काम में लगे । गुरु जी द्वारा पकड़े जाने पर सच-सच पूरी घटना बताई ।

इसी प्रकार  विद्यालय में  निरीक्षण हेतु  इंस्पेक्टर के आने का  घोषणा हुई । केशव ने  इंस्पेक्टर के आने पर  सभी कक्षाओं में वंदेमातरम् के जय घोष की  रचना योजना बनाई  ।जब इंस्पेक्टर कक्षाओं में पहुंचे  तो सभी कक्षाओं में  वंदे मातरम का जयघोष  सुनकर  बौखला गए  ।उन्होंने तुरंत  इस योजना के  नेतृत्व कर्ता का पता लगाकर  विद्यालय से  निष्कासित करने का आदेश दिया । सभी विद्यार्थियों को पूछा गया परंतु किसी ने भी केशव का नाम नहीं बताया । कई दिनों तक सभी विद्यार्थियों को निष्कासित कर दिया गया परंतु अंत में जब केशव को लगा कि मेरे कारण सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर हो रहा है तब उन्होंने स्वयं आकर अपना नाम बताया । इस घटना के कारण केशव का विद्यालय से नाम पृथक कर दिया गया ।

विद्यार्थी जीवन में झंडा जीतने का खेल सभाओं में जाना मुष्टीफंड जमा करना मित्र मंडली में आंदोलनों की चर्चा करना आदि केशव के पसंदीदा कार्य थे ।

1906 नागपुर में प्लेग का भीषण प्रकोप हुआ इस काल में एक करोड़ लोग कालका वलित हुए इसी काल में डॉक्टर जी के पिता बलिराम जी भी और इन्हीं के साथ माता रेवती बाई ने भी प्राण त्याग दिए ।

 

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