बाल संस्कार

वृन्दा सहाय

स्वाधीनता का अमृत महोत्सव

मध्यभारत के गुमनाम नायक (Unsung Heroes) ……

वृन्दा सहाय

वृन्दा सहाय का जन्म सन् 1910 में लाला का बाजार लष्कर में बाला सहाय के पुत्र के रूप में हुआ था। आप छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय विचारों से ओतप्रोत थे। आपने मैट्रिक तक षिक्षा ग्रहण की षिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् आपने सार्वजनिक जीवन सन् 1936 ई0 में प्रारम्भ किया।

राष्ट्रीय आन्दोलन के लिये होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपमें संगठन खड़ा करने की असीम क्षमता थी। आपके विचारों को सुनकर लोगों में तत्कालीन अंग्रेज शासकों के प्रति आक्रोष भर जाता था। आपकी इसी क्षमता का उपयोग करते हुए आपको ग्वालियर राज्य सार्वजनिक सभा के कार्य को शिवपुरी जिले में प्रगति करने के वास्ते शिवपुरी जिला भेजा गया। वहाँ संगठन मजबूत करने के बाद आप पुनः ग्वालियर आ गये और देहात में कमेटियों की स्थापना व सम्मेलन आदि के कार्यों की सफलतापूर्वक संचालित करते रहे।

आपको भारत छोड़ो आन्दोलन के शुरू होने के पश्चात् सन् 1943 की बसंत पंचमी को सभा करते बन्दी बनाये गए और 4 माह 18 दिन के लिए मुंगावली जेल में बन्द कर दिया गया। वहाँ से छूटने के पश्चात् आप पुनः राष्ट्रीय आन्दोलन के कार्यक्रमों में लगे रहे व आजादी तक संघर्षरत् रहे।

 

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