बाल संस्कार

शं नो वरुणः

श्रुतम्-84

शं नो वरुणः

यह नौसेना का नीति वाक्य है। इसका मतलब है कि जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें। … यह भारतीय नौसेना की शक्ति का प्रतीक भी है।
यह तैतैत्तिरीयोपनिषद् की प्रार्थना से लिया गया है जो इस प्रकार है :-
ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः । शं नो भवत्वर्यमा । शं नो इन्द्रो बृहस्पतिः । शं नो विष्णुरुरुक्रमः । नमो ब्रह्मणे । नमस्ते वायो । त्वमेव प्रत्यक्षं बह्मासि । त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्म वदिष्यामि । ऋतं वदिष्यामि । सत्यं वदिष्यामि । तन्मामवतु । तद्वक्तारमवतु । अवतु माम । अवतु वक्तारम् ।
ॐ शान्तिः । शान्तिः । शान्तिः ।
अर्थ – देवता ‘मित्र’ हमारे लिए कल्याणकारी हों, वरुण कल्याणकारी हों । ‘अर्यमा’हमारा कल्याण करें । हमारे लिए इन्द्र एवं बृहस्पति कल्याणप्रद हों । ‘उरुक्रम’ (विशाल डगों वाले) विष्णु हमारे प्रति कल्याणप्रद हों । ब्रह्म को नमन है । वायुदेव तुम्हें नमस्कार है । तुम ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हो । अतः तुम्हें ही प्रत्यक्ष तौर पर ब्रह्म कहूंगा । ऋत बोलूंगा । सत्य बोलूंगा । वह ब्रह्म मेरी रक्षा करें । वह वक्ता आचार्य की रक्षा करें । रक्षा करें मेरी । रक्षा करें वक्ता आचार्य की । त्रिविध ताप की शांति हो ।

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