बाल संस्कार

 शिवाजी का रणनीतिक व मनोवैज्ञानिक युद्ध कौशल

*श्रुतम्-233*

 *शिवाजी का रणनीतिक व मनोवैज्ञानिक युद्ध कौशल*

 शिवाजी के पिता को इस शर्त पर रिहा किया गया कि शिवाजी महाराज कोंडाणा का महत्वपूर्ण और रणनीतिक महत्व का किला छोड़ देंगे और बीजापुर के किलों पर आक्रमण नहीं करेंगे। उस दौर में सिंहासन के लिए परिजनों की हत्या कर देना भी आम बात होती थी। लेकिन शिवाजी महाराज ने पिता और सौतेले भाई के लिए कोंडाणा का किला छोड़ दिया और बीजापुर पर 5 वर्ष तक कोई युद्ध नहीं किया। लेकिन इतने समय में अपनी विशाल सेना को मजबूत बना लिया और जावली इलाके और किले पर कब्जा करके बीजापुर की दक्षिण की तरफ से घेरेबंदी कर ली। आदिलशाह ने अपने सबसे बहादुर सेनापति अफज़ल खां को शिवाजी को मारने के लिए भेजा। *अफजल खां के वध के बाद शिवाजी ने 10 नवम्बर 1659 को प्रतापगढ़ के युद्ध में बीजापुर की सेना को हरा दिया।*

औरंगजेब ने शिवाजी की चुनौती का सामना करने के लिए बीजापुर की बड़ी बेगम के आग्रह पर अपने मामा शाइस्ता खान को दक्षिण भारत का सूबेदार बना दिया। शाइस्ता खान ने डेढ़ लाख सेना लेकर पुणे में उसने 3 साल तक लूटपाट की। शिवाजी ने 350 मावलों के साथ उस पर छापामार हमला कर दिया। शाइस्ता खान अपनी जान बचाकर भागा। शाइस्ता खान को इस हमले में अपनी 3 उंगलियाँ गंवानी पड़ी। औरंगजेब ने शाइस्ता खान को दक्षिण भारत से हटाकर बंगाल भेज दिया। लेकिन शाइस्ता खान अपने 15,000 सैनिकों के साथ फिर आया और शिवाजी के कई क्षेत्रों में आगजनी करने लगा। जवाब में शिवाजी ने मुगलों के क्षेत्रों में लूटपाट शुरू कर दी। शिवाजी ने 4 हजार सैनिकों के साथ सूरत के व्यापारियों को लूटने का आदेश दिया। उस समय हिन्दू मुसलमानों के लिए हज पर जाने का द्वार सूरत ही था। छत्रपति शिवाजी की इस रणनीति से मुगल सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

*शिवाजी की रणनीतिक सफलता का मुख्य आधार था सही समय का चयन और समय का तुरंत उपयोग।*

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