बाल संस्कार

संघ बिन और न दूजा

*श्रुतम्-186*

 *संघ बिन और न दूजा*

प्रोफेसर ए एन बाली की पुस्तक *नाउ इट कैन बी टोल्ड* में संघ के स्वयंसेवकों की उस भूमिका का हृदयस्पर्शी वर्णन मिलता है जो उन्होंने समूचे पश्चिमी पंजाब में हत्यारे मुजाहिदो से हिंदू भाइयों और बहनों की रक्षा करने में निभायी।

बाली लिखते हैं- *’ऐसी कठिन घड़ी में लोगों की रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम से विख्यात निःस्वार्थ हिंदू युवकों के अतिरिक्त और कौन आगे आया?*  उन्होंने प्रांत के प्रत्येक नगर के प्रत्येक मोहल्ले में हिंदू और सिख महिलाओं और बच्चों को संकट पूर्ण क्षेत्रों से निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। उन्होंने उनके लिए खाने-पीने चिकित्सा सहायता और कपड़ों का प्रबंध किया । हर प्रकार से उनकी देखभाल की। विभिन्न नगरों में अग्निशामक दल बनाए। भागते हुए हिंदुओं और सिखों को ढोने के लिए बसों और गाड़ियों का प्रबंध किया तथा ट्रेनों पर सुरक्षा दल तैनात किए ।

विभिन्न हिंदू तथा सिख बस्तियों में रात दिन का पहरा लगाया गया ।

लोगों को आत्मरक्षा करना सिखाया गया इन लोगों ने पीड़ित हिंदू और सिख जनों का अंत तक साथ दिया।

वे सबसे पहले सहायता करने उनके पास पहुंचे और सबसे बाद में वह अपना स्थान छोड़कर पूर्वी पंजाब के सुरक्षित स्थानों की ओर आए।’

 

आगे यह भी लिखा है कि- *’मैं पंजाब के विभिन्न जिलों के अनेक जाने-माने कांग्रेसी नेताओं के नाम गिना सकता हूं जिन्होंने अपने और अपने कुटुंम्बियों की रक्षा के लिए खुलेआम संघ की सहायता ली ।* सहायता की किसी भी पुकार को अनसुना नहीं किया गया। ऐसा भी हुआ जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को हिंदू मोहल्लों से निकालकर सुरक्षित अवस्था में लाहौर के मुस्लिम लीग के शरणार्थी केंद्रों तक पहुंचाया। जब समूचा पंजाब जल रहा था और कांग्रेसी नेता असहाय होकर दिल्ली में पड़े हुए थे, तब अपने अनुशासन, अपनी शारीरिक क्षमता और नि:स्वार्थ भावना के बल पर संकट मोल लेकर संघ के स्वयंसेवकों ने पंजाब के लोगों की रक्षा की।

अब यदि पंजाब से बाहर का कोई व्यक्ति पंजाब के हिंदुओं और सिखों से कहे कि वह सिखों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उन कर्म वीरों को भुला दें जिन्होंने अपने प्राणों पर खेलकर ञउनकी रक्षा की थी तो उसका यह प्रलाप कौन सुनेगा?’

अंत में प्रो बाली लिखते हैं- ‘पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भारत में चाहे जहां भी हो, बिना किसी अपवाद के,

 

सब के सब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आभारी हैं ।

*जब सबने उनका साथ छोड़ दिया था ऐसे समय में अकेले संघ ने ही उनका साथ दिया।*

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