बाल संस्कार

संघ में जाति, ऊंच-नीच, अस्पृश्यता जैसी कोई चीज नहीं है

*श्रुतम्-154*

*संघ में जाति, ऊंच-नीच, अस्पृश्यता जैसी कोई चीज नहीं है।*

अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य पूरे देश भर में बढ़ रहा था। प्रतिवर्ष संघ के प्रशिक्षण वर्ग भी लगा करते थे।

वर्ष 1934 में संघ का एक शिविर वर्धा के पास सेवाग्राम में लगा । जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से कुल 1500 स्वयंसेवकों ने भाग लिया था। इसी स्थान पर महात्मा गांधी का आश्रम भी था । महात्मा गांधी भी संघ के स्वयंसेवकों को नियमित रूप से शारीरिक करते, सेवा कार्य करते, एक साथ भोजन करते देखते थे तो उनके मन में भी संघ को समझने का विचार आया और गांधीजी इस शिविर में पधारे ।

इस शिविर में उन्होंने संघस्थान, पाकशाला, रुग्णालय आदि सभी स्थानों का भ्रमण किया और स्वयंसेवकों से बातचीत भी की । इस दौरान उन्हें पता चला कि इनमें ब्राम्हण, महार, मराठा आदि सभी जातियों के स्वयंसेवक एक साथ घुल मिलकर रहते हैं ।एक ही पंक्ति में भोजन करते हैं ।

इस पर महात्मा गांधी जी ने अप्पा जी  से कहा कि” जो कार्य मैं करना चाहता था वह कार्य तो आपने मुझसे पहले ही कर दिखाया”।

इसी प्रकार का अनुभव डॉक्टर अंबेडकर जी का भी सुनने को मिलता है

बाबा साहेब 1935 और 1939 में संघ शिक्षा वर्ग में गए थे। 1937 में उन्होंने कतम्हाडा में विजयादशमी के उत्सव पर संघ की शाखा में भाषण भी दिया था। इस दौरान वहां 100 से अधिक वंचित और पिछड़े वर्ग के स्वयंसेवक थे। जिन्हें देखकर डॉ. आंबेडकर को आश्चर्य तो हुआ ही बल्कि भविष्य के प्रति उनकी आस्था भी बढ़ी। सितंबर 1948 में उनकी भेंट गुरुजी से भी हुई थी। अम्बेडकर जी ने संघ के बारे में कहा कि “संघ में जाति, ऊंच-नीच, अस्पृश्यता जैसी कोई चीज नहीं है।”

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *