बाल संस्कार

*समतामूलक व शोषण-मुक्त समाज के निर्माण से राष्ट्र का सशक्तीकरण संभव है*

*श्रुतम्-163*

डा़ अम्बेडकर के पास भारतीय समाज का आंखों देखा अनुभव था, तीन

हजार वर्षों की पीड़ा भी थी। इसलिए अम्बेडकर सही अर्थों में भारतीय समाज की उन गहरी वस्तुनिष्ठ सच्चाइयों को समझ पाये जिन्हें कोई मार्क्सवादी नहीं समझ सकता। अम्बेडकर का सपना था कि समतामूलक समाज हो, शोषण-मुक्त समाज हो। दरअसल आज उनका यही सपना सबसे ज्यादा प्रासंगिक है और इसी के कारण अम्बेडकर भी सबसे ज्यादा प्रासंगिक है।

उनके समूचे जीवन और चिंतन के केंद्र में यही एक सपना है।

*एक जातिविहीन, वर्गविहीन, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषमताओं से मुक्त समाज।*

ऐसा समाज बनाने के लिए हिंदू समाज का सशक्तिकरण सबसे पहली प्राथमिकता होगी। यही अम्बेडकर की सोच और संघर्ष का सार है। आज अम्बेडकर इस देश के संघर्षशील और परिवर्तनकारी समूहों के हर महत्वपूर्ण सवाल पर प्रासंगिक है। इसी कारण वह विकास के लिए संघर्ष के प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं। आज हिंदुत्व के सहारे ही समाज में एक जन-जागरण शुरू किया जा सकता है,जिसमें हिंदू अपने सभी मतभेदों से ऊपर उठकर स्वयं को *विराट -अखंड हिंदुस्थानी समाज के रूप में संगठित कर भारत को एक महान राष्ट्र बना सकते हैं।*

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