बाल संस्कार

सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय

श्रुतम्-89

सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय

यह आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) का ध्येय वाक्य है।
सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय च (शाब्दिक अर्थ – ‘सभी लोगों के हित के लिए एवं सभी लोगों के सुख के लिए’) एक सूत्रवाक्य है जो त्रिपिटक के विनयपिटक में मिलता है। इसी सूत्र का अनुसरण करते हुए गौतम बुद्ध ने (ईसापूर्व ५वीं शताब्दी में) अपने शिष्यों को जनसामान्य के कल्याण एवं सुख के लिए कार्य करने का उपदेश दिया।
समाज को जब अनेकानेक कर्मकांडों ने अपने बंधनों में जकड़ा हुआ था। परिणामतः कुछ वर्ग अपने स्वार्थों के लिए अन्य वर्गों का शोषण करने में जुटे थे। बलि प्रथा, पशु-पक्षियों के प्रति हिंसा का वातावरण था। तंत्र-मंत्र के प्रचलन के कारण लोगों की धर्म से आस्था उठने लगी थी। भौतिकता के बढ़ते प्रकोप के कारण उनके मन अविश्वासी और शंकालु बनते जा रहे हैं। ऐसे समय में महात्मा बुद्ध ने लोगों को आशा की किरण दिखाई। उनके द्वारा दिया करुणा का सिद्धांत (सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय) आज भी जनमानस के लिए वरदान है।

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