बाल संस्कार

स्वामी विवेकानंद का युवाओं के नाम संदेश

श्रुतम्-73

स्वामी विवेकानंद का युवाओं के नाम संदेश

उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
ब्रह्मांड में समस्‍त शक्ति हमारे अंदर ही मौजूद है। वह हम खुद हैं, जिन्‍होंने अपने-अपने हाथों से अपनी आंखों को बंद कर लिया है। इसके बावजूद हम चिल्‍लाते हैं कि यहां अंधेरा है।
हमारा कर्तव्‍य है कि हर संघर्ष करने वाले को प्रोत्‍साहित करना है ताकि वह सपने को सच कर सके और उसे जी सके।
हम वो हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है। इसलिए आप जो भी सोचते हैं उसका ख्‍याल रखिए। शब्‍द बाद में आते हैं। वे जिंदा रहते हैं और दूर तक जाते हैं।
कोई एक जीवन का ध्‍येय बना लो और उस विचार को अपनी जिंदगी में समाहित कर लो। उस विचार को बार-बार सोचो। उसके सपने देखो। उसको जियो। दिमाग, मांसपेशियाें, नसें और शरीर का हर भाग में उस विचार को भर लो और बाकी विचारों को त्‍याग दो। यही सफल होने का राज है। सफलता का रास्‍ता भी यही है।
जब तक तुम खुद पर भरोसा नहीं कर सकते तब तक खुदा या भगवान पर भरोसा नहीं कर सकते।
यदि हम भगवान को इंसान और खुद में नहीं देख पाने में सक्षम हैं तो हम उसे ढ़ूढ़ने कहां जा सकते हैं।
जितना हम दूसरों की मदद के लिए सामने आते हैं और मदद करते हैं उतना ही हमारा दिल निर्मल होता है। ऐसे ही लोगों में ईश्‍वर होता है।
यह कभी मत सोचिए कि किसी भी आत्‍मा के लिए कुछ भी असंभव है। ऐसा सोचना सबसे बड़ा अधर्म है। खुद को या दूसरों को कमजोर समझना ही दुनिया में एकमात्र पाप है।
यह दुनिया एक बहुत बड़ी व्‍यायामशाला है, जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

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