बाल संस्कार

हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र

*हनुमान चालीसा में छिपे मैनेजमेंट के सूत्र…*

कई लोगों की दिनचर्या हनुमान चालीसा पढ़ने से शुरू होती है।  *हनुमान चालीसा* में 40 चौपाइयां हैं, कुछ चौपाइयों की जानकारी ।

*1गुरु ही जीवन का आधार*

*श्रीगुरु चरन सरोज रज,*

*निज मनु मुकुरु सुधारि।*

*अर्थ* – अपने गुरु के चरणों की धूल से अपने मन के दर्पण को साफ करता हूं। जीवन में गुरु नहीं है तो आपको कोई आगे नहीं बढ़ा सकता। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।

समझने वाली बात ये है कि गुरु यानी अपने से बड़ों का सम्मान करना जरूरी है। अगर तरक्की की राह पर आगे बढ़ना है तो विनम्रता के साथ बड़ों का सम्मान करें।

*2 ड्रेसअप का रखें ख्याल…*

*कंचन बरन बिराज सुबेसा,*

*कानन कुंडल कुंचित केसा।*

*अर्थ* – आपके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है, सुवेष यानी अच्छे वस्त्र पहने हैं, कानों में कुंडल हैं और बाल संवरे हुए हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में जागने, नित्य व्यायाम – प्राणायाम से शरीर सुन्दर बनता है । पहनावे से मनुष्य की सभ्यता की पहचान होती है,  साथ ही पहनावे का भी मन पर गहरा संस्कार बनता है ।

*3 सिर्फ डिग्री काम नहीं आती*

*बिद्यावान गुनी अति चातुर,*

*राम काज करिबे को आतुर।*

*अर्थ* – आप विद्यावान हैं, गुणों की खान हैं, चतुर भी हैं। राम के काम करने के लिए सदैव आतुर रहते हैं।

आज के दौर में एक अच्छी डिग्री होना बहुत जरूरी है। लेकिन चालीसा कहती है सिर्फ डिग्री होने से आप सफल नहीं होंगे। विद्या हासिल करने के साथ आपको अपने गुणों को भी बढ़ाना पड़ेगा, बुद्धि में चतुराई भी लानी होगी। हनुमान में तीनों गुण हैं, वे सूर्य के शिष्य हैं, गुणी भी हैं और चतुर भी।

*4 अच्छा लिसनर बनें*

*प्रभु चरित सुनिबे को रसिया,*

*राम लखन सीता मन बसिया।*

*अर्थ* -आप राम चरित यानी राम की कथा सुनने में रसिक है, राम, लक्ष्मण और सीता तीनों ही आपके मन में वास करते हैं, जो आपकी प्रायोरिटी है, जो आपका काम है, उसे लेकर सिर्फ बोलने में नहीं, सुनने में भी आपको रस आना चाहिए।

अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। अगर आपके पास सुनने की कला नहीं है तो आप कभी अच्छे लीडर नहीं बन सकते।

*5 कहां, कैसे व्यवहार करना है ये ज्ञान जरूरी है*

*सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा,* *बिकट रुप धरि लंक जरावा।*

*अर्थ* – आपने अशोक वाटिका में सीता को अपने छोटे रुप में दर्शन दिए। और लंका जलाते समय आपने बड़ा स्वरुप धारण किया।

कब, कहां, किस परिस्थिति में खुद का व्यवहार कैसा रखना है, ये कला हनुमानजी से सीखी जा सकती है।

*अनावश्यक शरीर बल, विद्या बल और धन बल का हर समय उपयोग नहीं करना चाहिए ।* अक्सर लोग ये ही तय नहीं कर पाते हैं कि उन्हें कब किसके सामने कैसा दिखना है।

*6अच्छी सलाह देवे व लेवे*

*तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,* *लंकेश्वर भए सब जग जाना।*

*अर्थ* – हनुमान जी ने सलाह दी और विभीषण ने आपकी सलाह मानी, वे लंका के राजा बने ये सारी दुनिया जानती है।

विभीषण को राम भक्त के रुप में देख कर उन्हें राम से मिलने की सलाह दे दी। विभीषण ने भी उस सलाह को माना तो राम द्वारा लंका के राजा बनाए गए। किसको, कहां, क्या सलाह देनी चाहिए, इसकी समझ बहुत आवश्यक है।

*7 आत्मविश्वास की कमी ना हो*

*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही,* *जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।*

*अर्थ* – राम नाम की अंगुठी अपने मुख में रखकर आपने समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई अचरज नहीं है।

अगर आपमें खुद पर और अपने परमात्मा पर पूरा भरोसा है तो आप कोई भी मुश्किल से मुश्किल टॉस्क को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

आज के युवाओं में एक कमी ये भी है कि उनका भरोसा बहुत टूट जाता है। आत्मविश्वास की कमी भी बहुत है। प्रतिस्पर्धा के दौर में आत्मविश्वास की कमी होना खतरनाक है। अपनेआप पर पूरा भरोसा रखे ।

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