बाल संस्कार

हिंदुत्व के प्रधान पक्ष-1 कृतज्ञता व परोपकार

*श्रुतम्-248*

 *हिंदुत्व के प्रधान पक्ष-1 कृतज्ञता व परोपकार*

 *कृतज्ञता-:*

व्यक्तियों एवं अन्य जीवित प्राणियों के प्रति जो हमारे सहयोगी रहे हैं, कृतज्ञता का भाव रखना, हिंदू जीवन पद्धति है।

ईश्वर के किसी रूप अथवा चुनी गई विधि से उपासना का आधार भी यही भावना है। पुनः यही भावना देवताओं के समान माता-पिता एवं शिक्षक के प्रति आदर का आधार है। पति एवं पत्नी के मध्य अटूट बंधन का आधार भी यही कृतज्ञता की भावना है। पुनश्च, यही कृतज्ञता की भावना पेड़ पौधों एवं पशुओं की पूजा की प्रथा, साथ ही दशहरे के आयुध पूजा के दिन, सभी उपकरणों अथवा औजारों जिनसे हम जीविकोपार्जन करते हैं, की उपासना का आधार है। इस भावना के कारण ही गायों, बछड़ों, बैलों की हत्या को निषिद्ध किया गया है, क्योंकि गाय हमें बाल्यावस्था से मृत्यु तक जीवनदायी दूध प्रदान करती है तथा बैल, कृषि एवं परिवहन में हमारी सहायता करते हैं। हम गाय की पूजा, गौ माता के रूप में करते हैं।

 

*परोपकार-:*

दूसरों के प्रति सहृदय होना विशेषकर उनके प्रति जिनको इसकी तत्काल आवश्यकता है। उन्हें भोजन, दवा अथवा अन्य किसी प्रकार की सहायता प्रदान करना ही ईश्वर की सेवा के बराबर है।

कहा गया है-

*नर सेवा ही नारायण सेवा है।*

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