बाल संस्कार

हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर

*श्रुतम्-164*

हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि का निर्माण हुआ था, इसलिए इस दिन हिन्दू नववर्ष के तौर पर मनाया जाता है।

*इस दिन को संवत्सरारंभ, गुडीपडवा, युगादि, वसंत ऋतु प्रारंभ दिन आदि नामों से भी जाना जाता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष मनाने के नैसर्गिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कारण हैं।*

१. सृष्टि की रचना का दिन। इसी दिन सूर्य की प्रथम किरण धरती पर पड़ी।

२. प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक का दिन।

३. युधिष्ठिर के राज्याभिषेक का दिन। कलियुग के प्रारंभ का दिन

४. महर्षि गौतम का जन्मदिन

५. आर्य समाज का स्थापना दिवस

६. वरूणावतार भगवान झूलेलाल का जन्मदिन

७. गुरु अंगद देव जी का जन्म दिवस

८. भारत में प्रचलित लगभग सभी संवत्सरों का प्रथम दिन

९. संघ संस्थापक परम पूजनीय डाक्टर हेडगेवार जी का जन्म दिवस

१०. महाराज विक्रमादित्य द्वारा शकों पर विजय पश्चात विक्रम संवत का प्रारंभ

११. नवरात्रि की शक्ति संचय साधना का प्रथम दिवस

और सबसे बड़ी बात प्रकृति में नई कोंपलों के साथ नवीन सुगंधित वातावरण।

*हम क्या करें-*

१. पूर्व संध्या पर और उस दिन भी संध्या काल में ११ दीपक प्रज्वलित करें।

२. प्रातः काल अपने घर के सामने रंगोली बनाएं

३. ॐ अंकित पताका अपने घर पर लगाते। द्वार पर आम के पत्तों की बंदनवार सजाए।

४. सगे संबंधियों, मित्रों, पडौसियों, कार्यस्थल के साथियों आदि को शुभकामनाएं प्रेषित करें

५. घर में मिष्ठान्न बनायें और बच्चों को अपने नव वर्ष का महत्व समझायें।

हमे देता सदा मधुमास

नवहर्ष मंगलमय,

सकल संसार में जो श्रेष्ठम

आदर्श मंगलमय।।

सजी धरती खिले उपवन

सुखद मौसम यही कहते,

तुम्हे प्रिय चैत्र शुक्ला प्रतिपदा

नववर्ष मंगलमय।।

तुम्हे सदा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा

नववर्ष मंगलमय

 

 

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