बाल संस्कार

हिंदू समाज की अकेलेपन की भावना को हटाना ही सभी समस्याओं का समाधान है

*श्रुतम्-145*

*हिंदू समाज की अकेलेपन* *की भावना को हटाना ही* *सभी समस्याओं का समाधान है।*

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, यह नाम गहन विचार के पश्चात निश्चित किया गया। इस नाम में प्रत्येक शब्द महत्व का है। इसका अर्थ हमें समझ लेना चाहिए। प्रथम ‘संघ’, यह शब्द देखें संघ अर्थात अनेक लोग। अकेले का कभी संघ नहीं होता ।अपना हिंदू समाज संख्या से इतना बड़ा होने पर भी हर एक को लगता था कि मैं अकेला हूं। डॉक्टर हेडगेवार जी के जीवन की एक घटना बहुत कुछ बतलाती है। यह घटना संघ स्थापना के पूर्व की है । उस समय डॉक्टर जी कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। अंग्रेज सरकार का निषेध करने के लिए  गांव-गांव में जनसभाओं का आयोजन था । उन सभाओं में सरकार के निषेध का प्रस्ताव पारित कराना था। इन सभाओं  के   निमित्त डॉक्टर जी चंद्रपुर गए थे।

नागपुर में भी सभा का आयोजन था। यह सभा नागपुर के टाउन हाल के मैदान में थी। मैदान लोगों से खचाखच भरा था। वक्ताओं के जोरदार भाषण हुए और निषेध प्रस्ताव का पढ़ना शुरू हुआ।

तभी कोई चिल्लाया ‘सांप रे सांप’ और लोगों ने भागना शुरु किया। उन्हें भागते देख शेष लोग भी मानो अपने ही पीछे सांप है’ इस कल्पना से जानकर बचाकर भागने लगे। उस समय के दैनिक महाराष्ट्र समाचार पत्र में इस भागदौड़ का रस भरा वर्णन प्रकाशित हुआ है। हम क्यों भाग रहे हैं, यह जानकारी साधारण लोगों को नहीं थी। सब भाग रहे हैं, इसलिए वे भी भाग रहे थे।

डॉक्टर जी चंद्रपुर से लौटने पर अनेक नेताओं के पास गये और उनसे सभा का वृत पूछने लगे। हर एक यही बतलाने लगा कि सभा विशाल थी, भाषण जोरदार हुए, किंतु किसी शरारती ने रबड़ का खिलौना सांप फेंककर ‘सांप रे सांप’ की चिल्लाहट के साथ भागना शुरू किया और सारी सभा भाग खड़ी हुई। डॉक्टर जी ने पूछा, आप तो वहीं थे। आप ने लोगों को रोका क्यों नहीं?  एक ने कहा, मैं अकेला क्या कर सकता था ? बहुत ने यही उत्तर दिया। सभा में इतने लोग रहने पर भी हर एक को लगता था कि, “मैं अकेला हूं। डॉक्टर जी ने यह तय किया कि हिंदू समाज की यह अकेलेपन की भावना हटाना है। इसलिए संघ आरंभ हुआ।

हर रोज अपनी संगठना का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है, ऐसा कोई नहीं बतलाता।’ संघ ‘यह छोटा नाम है । सब की बातचीत में है। आप कहां जा रहे हैं ? का उत्तर है,’ संघ ‘ में । आज संघ का कार्यक्रम है’ यह संघ की शाखा है’, यह संघ स्थान है’ बस संघ महत्व का है यानी अनेक रहने पर भी हम सब एक हैं। यह भावना महत्व की है।

इसी भावना की हिंदू समाज में कमी थी । सामाजिक भावना का अभाव था । संघ ने यह अभाव दूर किया ।हम हिंदू लोग बहुत अधिक व्यक्तिनिष्ठ हैं, बहुत बड़े तो परिवारनिष्ठ  संघ ने स्वयंसेवकों को समाजनिष्ठ बनाया । समाज निष्ठा का व्रत लेने वाले लोगों का एकत्रीकरण यानी संघ। इसलिए अपने यहां कहा जाता है कि संघ संस्कार देने वाला विद्यालय है । कौन से संस्कार? हिंदू समाज की एकता के, सामाजिक जीवन जीने के तथा अपने समाज के प्रति मेरा कर्तव्य है ,यह ध्यान में रखते हुए जीवन चलाने के संस्कार । ‘संघ’ इस शब्द का इतना व्यापक अर्थ है ।

और इसी के द्वारा डॉ हेडगेवार ने हिंदू समाज में एक क्रांति का शुभारंभ किया आजादी के आंदोलन में संघ की एकात्मकता की भावना व्यापक रूप से देखने को मिली।

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