बाल संस्कार

हिन्दू धर्म में मंगल प्रतीकों का महत्त्व-7

श्रुतम्-70

हिन्दू धर्म में मंगल प्रतीकों का महत्त्व-7

गोमती चक्र:-

यह एक पत्थर होता है, जो दिखने में साधारण लगता है, लेकिन होता चमत्कारिक है। इस पत्थर का नाम है गोमती चक्र। गोमती नदी में मिलने के कारण इसे गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्र के घर में होने से व्यक्ति के ऊपर किसी भी प्रकार की शत्रु बाधा नहीं रहती। इस चक्र के कई प्रयोग बताए गए हैं। इसको लाल सिंदूर की डिब्बी में रखना चाहिए। 11 गोमती चक्र लेकर उसे पीले वस्त्रों में लपेटकर तिजोरी में रखने से समृद्धि बनी रहती है।

नारियल:-

लाल कपड़े में लघु नारियलों को लपेटकर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित करने से लक्ष्मी लंबे समय तक आपके घर में निवास करती है।विसर्जित करने के बाद दूसरा लघु नारियल तिजोरी में रख सकते हैं। हालांकि लघु नारियल के और भी कई प्रयोग हैं। इसके घर में रखे होने से धन और समृद्धि बरकरार रहती है। इसके अलावा एकाक्षी नारियल को भी साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है, इसीलिए सर्वप्रथम इसे घर में रखने से धनलाभ होता है, साथ ही कई प्रकार की समस्याएं स्वत: ही दूर हो जाती हैं।

चांदी की गढ़वी :-

चांदी का एक इतना छोटा गढ़ा होता है कि उसमें 10-12 तांबे के सिक्के रख सकते हैं उसे गढ़वी कहते हैं। पुराने समय में यह लोगों के घरों में होती है। इसकी जगह कुछ लोग चांदी की पेटी रखते थे और उसमें सिक्के रखते थे। इससे घर में धन और समृद्धि बनी रहती है।

चरणामृत या पंचामृत का पात्र :-

तांबे का एक छोटा-सा पात्र जिसमें पानी भरा होता है और जो पूजाघर में रखा होता है। इसमें एक तांबे की ही चम्मच होती है। यह इसलिए पानी से भरा होता है ताकि व्यक्ति इस पानी को प्रतिदिन पीएं। इसके जल के कई प्रकार के लाभ हैं। सबसे बड़ा लाभ यह कि आप यह जल पीते रहेंगे, तो जीवन में कभी भी सफेद दाग की बीमारी नहीं होगी। चरणामृत और पंचामृत पीने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पंचामृत का अर्थ है ‘पांच अमृत’। दूध, दही, घी, शहद, शकर को मिलाकर पंचामृत बनाया जाता है।

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