बाल संस्कार

*श्रुतम्-152*

*क्रांतिकारी आंदोलन को प्रभावी बनाने में डॉक्टर जी की बड़ी भूमिका*

केशव राव डॉक्टर होकर यदि व्यवसाय करने लगते तो उनके उग्र प्रकृति बंधु का मन शांत होकर उन्हें घर में रहने का अनुकूल वातावरण मिलता ।

परंतु डॉक्टर को नागपुर आए काफी दिन बीत गए फिर भी व्यवसाय प्रारंभ करने का कोई रंग ढंग नहीं दिखा। जिन दिनों में डॉक्टरी परीक्षा पास करके आए थे उन दिनों इसकी  बड़ी मांग थी। उस समय के एक लेख से पता चलता है कि उन दिनों संपूर्ण मध्य प्रांत और बरार में निजी डॉक्टरी का व्यवसाय करने वालों की संख्या 75 से अधिक नहीं थी ।

विवाह के प्रस्ताव भी बहुत अधिक आने लगे। लोगों का यह आवागमन देखकर अंत में डॉक्टर जी के चाचा जी ने डॉक्टर जी को पत्र लिखा तथा पूछा कि आपका विवाह के संबंध में क्या विचार है यह एक बार स्पष्ट रूप से बता दो। इस पर उन्होंने चाचा जी को लिख भेजा “अविवाहित रहकर जन्म भर राष्ट्र कार्य करने का मैंने निश्चय किया है देश कार्य करते हुए कभी भी जीवन पर संकट आ सकता है यह जानते हुए भी एक लड़की के जीवन का नाश करने में क्या अर्थ है”

इसके उपरांत विवाह का विषय समाप्त हो गया।

इसी समय केशव राव ने बंगाल तथा पंजाब के क्रांतिकारियों से संपर्क स्थापित कर वर्धा तथा नागपुर जिलों के लगभग 20 तरुणों को एक पत्र के साथ उत्तर की ओर भेज दिया। गंगा प्रसाद पांडे ने राजस्थान के विभिन्न राज्यों की अनुकूल स्थिति का विचार कर इन लोगों की अलग-अलग रियासतों में नियुक्ति की तथा विद्रोह के संपूर्ण सूत्रों का संचालन करने की दृष्टि से अजमेर को केंद्र बनाया इस कार्य में अजमेर के प्रसिद्ध नेता श्री चांदकरण शारदा की भी गंगा प्रसाद को सहायता मिली ।

इसी बीच डॉक्टर के मन में एक बार पुणे जाकर लोकमान्य तिलक के दर्शन करने की इच्छा हुई डॉक्टर मुंजे से परिचय पत्र लेकर  वे पुणे गए तथा लोकमान्य से भेंट की ।

केशव राव ने स्वतंत्रता संग्राम में कोकेन के गुप्त नाम से क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया। नागपुर में श्री नाना साहब तेलंग तथा उनके 6-7 महाविद्यालय मित्र इकट्ठा रहते थे वे सभी इस क्रांतिकारी दल में सम्मिलित  थे तथा उनकी पुस्तकों के बक्से ही उन दिनों डॉक्टर की पिस्तौल तथा कारतूसों  को छिपाने के काम आते थे ।

इन दिनों गणेशोत्सव में डॉक्टर के बड़े गरम भाषण होते थे। इस निमित्त को लेकर उन्होंने संपूर्ण प्रांत का दौरा कर संबंधित तरुणों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनको निराशा के गर्त में डूबने से बचाने का प्रयत्न किया। इसी समय कारागृह से मुक्त हुए श्री अर्जुन लाल सेठी की देखरेख करने का आदेश भी डॉक्टर को मिला। अर्जुन लाल क्रांतिकारी आंदोलन में पकड़े गए थे तथा उनसे जानकारी प्राप्त करने के लिए पुलिस ने उनको भीषण यंत्रणाएं दी थी इस कारण वे कुछ पागल हो गए थे और उनका स्वास्थ्य बहुत गिर गया था। डॉक्टर जी ने अपने मित्र अप्पाजी जोशी के साथ मिलकर अर्जुन लाल सेठी का बहुत ध्यान रखा और परिणाम स्वरूप तीन-चार वर्षों में वे स्वस्थ हो गए। इस तरह डॉक्टर जी की क्रांतिकारी आंदोलन को प्रभावी बनाने में बहुत बड़ी भूमिका रही।

 

 

 

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