बाल संस्कार

 कश्मीरी हिंदुओं का बचाव

*श्रुतम्-211*

 *कश्मीरी हिंदुओं का बचाव*

सन 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में तथा 1990 के दशक के प्रारंभ में पाक समर्थित आतंकवादियों द्वारा कश्मीर घाटी के हिंदू समुदाय के विरुद्ध अमानुषिक यंत्रणा पहुंचाने की घटनाएं निरंतर बढ़ने लगी थी। हिंदुओं का सामूहिक नरसंहार, अपहरण इत्यादि घाटी में आम घटनाएं माने जाने लगी थी। अंततः हिंदू समुदाय विवश होकर जम्मू के क्षेत्रों की ओर पलायन करने लगा। इन विस्थापित हिंदुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं था। उनकी भौतिक कठिनाइयों के निराकरण के अतिरिक्त यह भी आवश्यक था कि उनके मनोबल को पुनः जीवित किया जाए।

यह कोई अप्रत्याशित बात नहीं थी कि जम्मू के स्वयंसेवक, यहां तक कि कश्मीरी हिंदुओं में से कई व्यक्ति तत्काल सेवा कार्य में जुट गए। वर्ष 1990 में जम्मू में *जम्मू कश्मीर सहायता समिति* गठित हुई और कई स्वयंसेवक इसके विभिन्न कठिन दायित्वों के निर्वहन में पूरी शक्ति से जुट गए।

सभी पीड़ित परिवारों का विस्तृत रजिस्टर तैयार करना पहला बड़ा कार्य था जिसे समिति के कार्यकर्ताओं ने अल्प समय में ही पूरा कर लिया।

विस्थापित हिंदुओं द्वारा विशाल प्रदर्शन करने के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार ने शिविर लगाना तथा निःशुल्क राशन, चिकित्सा सेवा, स्कूलों में पढ़ाने की व्यवस्था करना, सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना, गैर सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को ₹500 प्रति परिवार प्रति मास देना, जिन परिवारों के लोग मारे गए उन परिवारों को प्रति परिवार ₹100000 नगद तथा एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना स्वीकार किया।

सरकार के प्रयासों के अतिरिक्त समिति द्वारा भी प्रत्येक परिवार को उसके आकार और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 5000 से लेकर ₹25000 तक की राशि नगद और घरेलू आवश्यकता की अन्य सामग्री प्रदान की गई। विवाह योग्य लड़कियों के विवाह की व्यवस्था की गई तथा इसके लिए विवाह के निमित्त जोड़े के साथ ₹1000 से लेकर ₹5000 तक दिए गए।

इस कार्य में नागपुर की राष्ट्र सेविका समिति द्वारा दी गई सहायता बेजोड़ रही। समिति ने शिविरों में बीमार पड़े व्यक्तियों में 1100000 रुपए से भी अधिक की औषधियां वितरित की। साथ ही कैंसर, हृदय रोगों तथा ऐसे अन्य रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को भी वित्तीय सहायता प्रदान की।

ऐसा ही एक और प्रकोष्ठ कश्मीर में छूटे हुए भवनों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लिए क्षतिपूर्ति प्राप्त करता है।

महिला प्रकोष्ठ 5 से 15 दिन तक के विशेष शिविर आयोजित करता है जिसमें महिला कार्यकर्ताओं को यह सिखाया जाता है कि *वह किस प्रकार गृहणियों को उनकी शारीरिक और मानसिक समस्याओं के निराकरण में तथा उनमें आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता का भाव निर्माण करने में सहायता कर सकती हैं।*

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