बाल संस्कार

 कोविड-19 महामारी के काल में हमारा दायित्व

*श्रुतम्-242*

 *कोविड-19 महामारी के काल में हमारा दायित्व*

-दत्तात्रेय होसबाले जी (सरकार्यवाह)रा. स्व. संघ

 

-कोरोना के कारण भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व की स्थिति बदली है।

-कोरोना से पूर्व की स्थिति हम सब के लिए संस्मरण बन गई है।

-महामारी के कारण बहुत सारे परिवारों ने अपने परिवारजन व सगे-संम्बंधियों को खो दिया,बडे स्तर पर जनहानि और धनहानि हुई है।

-विद्यालय,न्यायालय बाधित रहे,बहुत सारे लोग रोजगार विहीन हो गये हैं,आर्थिक तंगी भी आयी है।

-इस विषम परिस्थिति मे,समाज के बहुत सारे सेवाभावी संगठन,ब्यक्ति व संघ के स्वंयसेवक आगे आये और अपने सामाजिक कर्तव्य को बडी निष्ठा के साथ पूरा करते हुए भोजन,दवाई,यातायात और आईसोलेशन की ब्यवस्था को संभाला।

-स्वंयसेवकों ने भी समाज मे जाकर नई-नई युक्तियों के साथ बडे ही सेवाभाव से अपना कर्तब्य निभाया।

-ऐसे विषम कालखण्ड विश्व के अन्यान्य देशों में,समय-समय पर आते ही रहते हैं,इसलिए हमें सदैव तैयार रहना चाहिए।

-पिछली तालाबंदी में *परमपूज्यनीय सरसंघचालक जी ने बताया था कि एकांत मे साधना…लोकांत मे परोपकार* इसे स्वंयसेवकों ने चरितार्थ किया।

-प्रवासी मजदूरों को भी अपना आशियाना छोडकर, दु:ख कष्ट सहते हुए,अपने गाँव कस्बे की तरफ पैदल ही चलना पडा,फिर भी वो बिना कोई हो-हल्ला किए,महामारी की जटिलता को समझते हुए शांति से चले गये।

-स्वंयसेवकों को भी सेवा करने का कोई पूर्वाभ्यास नहीं कराया गया था किंतु यह एक गुण है जो शाखा मे जाकर स्वत: ही आ जाता है।

*अभी हमारे लिए तीन करणीय कार्य हैं*…..

(१) पुनर्वास…रोजगार की चिंता,जनहानि पर सांत्वना, कांउसलिंग आदि व शिक्षा….पढाई की चिंता।

(२)तीसरी लहर….न आये ऐसी प्रार्थना करें । लेकिन यदि आती भी है तो पूर्व तैयारी रखें।

(३)नित्यकार्य,शाखा…. नित्यसिद्धशक्ति के निर्माण के लिये हमें पूर्व की भाँति लगना पडेगा।

*डा. सर्वपल्लीराधाकृष्णन का कथन..”हम सभ्यता का निर्माण कर रहे हैं,किसी फैक्ट्री का नहीं, चरित्रनिर्माण हमारी प्राथमिकता मे होना ही चाहिए”*

*महामना मालवीय जी ने भी कहा था कि ग्रामे-ग्रामे सभाकार्ये,ग्रामे-ग्रामे कथा शुभे,ग्रामे-ग्रामे पाठशाला,ग्रामे-ग्रामे मल्यशाला,ग्रामे-ग्रामे महोत्सवे*

-सेवा कार्य करते हुये हमें कुछ बुराइयां..जैसे.. स्वार्थ,लालच,सत्तालोभ,

छुआ-छूत,जातिभेद आदि से बचना चाहिए।

-भारतदेश का सम्पूर्ण समाज,संघ के स्वंयसेवकों की तरफ,आशा भरी नजरों से देख रहा है।

इसलिए हमें और अधिक मजबूती के साथ तैयार होकर खडा रहना होगा….

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