बाल संस्कार

हिंदू होने का गौरव-3 (वर्ष 1896 तक विश्व में भारत ही रत्नों का एकमात्र स्रोत था)

*श्रुतम्-255*

 *हिंदू होने का गौरव-3*

 

जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका के अनुसार वर्ष 1896 तक विश्व में भारत ही रत्नों का एकमात्र स्रोत था।

अमेरिका स्थित IEEE ने साबित किया कि प्रोफेसर जगदीश चंद्र बसु ही बेतार संचार प्रणाली के अन्वेषक थे, न कि मारकोनी, जिसके बारे में विश्व का वैज्ञानिक समाज 100 साल भ्रम में रहा।

सिंचाई के लिए *जलाशय एवं बांध* का निर्माण विश्व में सबसे पहले भारत में *सौराष्ट्र* में हुआ।

ईसा पूर्व 150 वर्ष के शक राजा रुद्रदामन प्रथम के अनुसार- रैवतक पहाड़ी पर मनोरम झील *सुदर्शन* का निर्माण *चंद्रगुप्त मौर्य* के कार्यकाल में हुआ।

*शतरंज* (चतुरंग या अष्टपद) का मूल उद्भव स्थान भारत ही है।

शल्य चिकित्सा के प्रणेता थे- *सुश्रुत* । 2600 वर्ष पूर्व सुश्रुत तथा समकालीन चिकित्सा शास्त्रियों ने अति जटिल शल्यक्रियाओं की, जैसे- सिजेरियन, मोतियाबिंद, अवयव प्रत्यारोपण, पथरी आदि। यहां तक कि *प्लास्टिक एवं शल्य क्रिया में सवा सौ से अधिक उपकरण* प्रयुक्त होते थे। अनेक प्राचीन ग्रंथों में शरीर शास्त्र, जंतु-वनस्पति विज्ञान, भ्रूण विज्ञान, पाचन क्रिया, चयापचय, अनुवांशिकता विज्ञान और रोग से प्रतिरक्षा का गहरा ज्ञान पाया जाता है।

5000 वर्ष पूर्व जब विश्व की अनेक सभ्यताएं जंगल निवासी घुमंतू लोगों तक ही सीमित थी, हिंदुओं ने सिंधु घाटी में हड़प्पा सभ्यता का विकास किया।

स्थान मूल्य प्रणाली, दशमलव प्रणाली का विकास भारत में ही ईसा की पहली शताब्दी में हुआ।

*मानव सभ्यता के विकास के लिए अनेक अजस्र अनुदान इस विश्व को हिंदुओं से ही प्राप्त हुए।*

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