बाल संस्कार

देशभक्ति के रंग में रंगा वामन दृष्टि महाशिविर

इंदौर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विद्या भारती प्रतिष्ठान के रजत जयंती वर्ष के मौके पर आयोजित वामन दृष्टि महाशिविर को संबोधित किया। उन्होंने 11 हजार से ज्यादा स्वयंसेवकों को अपने पथ पर सदैव आगे बढ़ते रहने की सीख दी। वे बोले जो चिल्लाता है, उसे चिल्लाने दो। दुनिया धमकाए, डराए, परिहास करे, करने दो, मगर अपनी राह से मत डिगो। संघ प्रमुख ने कहा- विद्या भारती शिक्षा को धर्म से जोडऩा चाहती है। यह धर्म पूजा पद्धति वाला नहीं बल्कि समाज और देश को जाग्रत करने वाला है। उन्होंने कहा परिस्थितियां कैसी भी हों, लेकिन माता को वैभव संपन्न बनाए बगैर हम पीछे मुड़ ही नहीं सकते। इतिहास का जिक्र करते हुए भागवत ने द. भारत के मुस्लिम शासक कुतुबुद्दीन शाह के पुर्खों को ब्राह्मण बताया। वामन ने अपने लिए कभी कुछ नहीं मांगा। वैसी दृष्टि और चिंतन के साथ काम करते रहें।

क्या है वामन दृष्टि…
वामन अवतार में भगवान विष्णु ने अपने तीन छोटे-छोटे कदमों से धरती-आकाश व पाताल नापा था। विद्या भारती प्रतिष्ठान चाहता है उनके शिक्षक वामन दृष्टि व चिंतन के साथ काम करें। छोटे-छोटे प्रयासों से वामन के पहले व दूसरे पग की तरह समूचे समाज में संस्कारमय शिक्षा व सृष्टि की रक्षा के लिए पर्यावरणीय ज्ञान का प्रकाश फैलाएं। वामन की तरह विपरीत परिस्थितियों में काम करने की शिक्षक प्रेरणा लें। तीसरे पग में वामन देव ने राजा बलि (स्वार्थ और अधर्म के प्रतीक) को पाताल में दबा दिया था।


केशव विद्यापीठ के सामने हाई लिंक सिटी में 70 एकड़ जमीन पर संघ के 11 नगर बसे हैं और इनमें 11 हजार स्वयंसेवकों का डेरा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के मुख्य पंडाल में पहुंचने (सुबह-9.55 बजे) से पहले सभी अपने स्थान पर बैठ चुके थे। इस दौरान कोई कोलाहल नहीं उठा। संघ के मालवा प्रांत के संघ चालक कृष्णकुमार अष्ठाना के साथ अन्य संघ पदाधिकारी, प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी आदि मंच के नीचे बैठे थे। संघ प्रमुख के उद्बोधन के बाद लोग जिस तरह से चुपचाप आए थे उसी तरह वापस अपने-अपने नगरों की कुटिया में चले गए। रविवार को महाशिविर का समापन होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान उपस्थित रहेंगे। संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का बौद्धिक भी होगा।

सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान के 25 वर्ष पूर्ण होने पर संघ द्वारा रजत जयंती मनाई जा रही है। सरस्वती शिशु मंदिर की विकास यात्रा में सहभागी रहे लोगों को इसमें आमंत्रित किया गया है। संघ प्रमुख से पहले विद्या भारती के अभा संरक्षक ब्रह्मदेव शर्मा ने कहा विद्या भारती प्रतिष्ठान भारतीयता को आगे लाने का काम कर रहा है। इस दौरान अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में शिशु मंदिरों की बालिकाओं ने सरस्वती वंदना भी प्रस्तुत की। रजत जयंती वर्ष की पत्रिका सोपान का विमोचन भी हुआ। इस दौरान नगरीय और वनवासी क्षेत्र की कार्यकारिणी और उपसमिति के लोगों के साथ ग्रामीण और जिला समिति सदस्य, शिशु मंदिरों के सारे प्राचार्य, प्रधानाचार्य, 10 साल से सेवाएं दे रहा स्टाफ, आजीवन सेवा देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक, बस्ती क्षेत्र के 1500 संस्कार केंद्रों के संयोजक मंडल के दो प्रमुख आचार्य, शिशु मंदिर के एक हजार पूर्व विद्यार्थी, लगातार पांच वर्ष तक सराहनीय कार्य करने वाले शिक्षक, शिक्षा के क्षेत्र में समाज केंद्र को गोद लेने वाले व्यक्ति उपस्थित थे।

सक्सेना का सम्मान- मध्य प्रांत में रीवा में वर्ष 1967 में पहले शिशु मंदिर की स्थापना करने वाले रोशनलाल सक्सेना का संघ प्रमुख श्री भागवत ने सम्मान किया। सीहोर कृषि महाविद्यालय की नौकरी छोड़कर संघ कार्य में जुटकर श्री सक्सेना ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया संघ के शिशु मंदिर लेह-लद्दाख से लेकर चीनी सीमा के भारतीय गांवों में भी संचालित है। तवांग से 20 किमी की दूरी पर भी विद्यालय चल रहे हैं। पोर्ट ब्लेयर में भी शिक्षा का प्रसार हो रहा है। उधर इस आयोजन से आसपास की बस्तियों के लोग नई सड़क बनने स खुश हैं।

महाशिविर से संकल्प लेकर लौटे स्वयंसेवक

मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी।



वामन दृष्टि महाशिविर में तीन दिनों तक संस्कारित और जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा के प्रसार को लेकर गंभीर चिंतन हुआ। धर्म आधारित शिक्षा पर खासा जोर रहा। संकल्प लिया गया कि मध्य प्रांत में 3.5 लाख विद्यार्थी हैं और आने वाले वर्ष में इसे दो लाख बढ़ाकर 5.5 लाख किया जाएगा। मातृभाषा में शिक्षा की महत्ता भी लोगों को समझाएंगे। भैंसदेही (रायसेन) और ढाबा (बैतूल) में दो नए छात्रावास भी संचालित होंगे।

शिविर में चिंता जताई गई कि रायसेन क्षेत्र में मिशनरियां जो छात्रावास चला रही हैं, उनमें से कई बालिकाओं को उच्च शिक्षा के नाम पर बाहर भेजा जाता है। मतांतरण के कारण इसमें से कई लौट ही नहीं पाती हैं। विद्या भारती प्रतिष्ठान के प्रदेश संगठन मंत्री मोहन गुप्त ने कहा जोर इस बात पर भी दिया गया कि 30 एकल विद्यालय के बीच एक पूर्ण छात्रावास या शक्ति केंद्र की स्थापना जरूरी है जो क्षेत्र में मार्गदर्शक की भूमिका का निर्वहन कर सके। सरस्वती शिशु मंदिर के भैया-बहनों के माध्यम से वसंत पंचमी पूजन पर एकत्रित की गई राशि एक करोड़ रुपए से अभी तक एकल विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इस शिविर के दौरान 11 करोड़ रुपए का कोष स्थापित हुआ है। इस राशि के ब्याज से छात्रावास और शक्ति केंद्रों की स्थापना की जाएगी। अंतिम दिन शिशु मंदिर की बालिकाओं ने शक्ति आराधना की प्रस्तुति भी दी।

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