बाल संस्कार

हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर

*श्रुतम्-164* हिंदू नववर्ष या नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टि का निर्माण हुआ था, इसलिए…

*समतामूलक व शोषण-मुक्त समाज के निर्माण से राष्ट्र का सशक्तीकरण संभव है*

*श्रुतम्-163* डा़ अम्बेडकर के पास भारतीय समाज का आंखों देखा अनुभव था, तीन हजार वर्षों की…

*राष्ट्र एक भाव है, एक चेतना है, जिसका सबसे छोटा घटक व्यक्ति है और व्यक्ति को सुसंस्कृत तथा राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा होना चाहिए*

*श्रुतम्-162* *राष्ट्र एक भाव है, एक चेतना है, जिसका सबसे छोटा घटक व्यक्ति है और व्यक्ति…

*अम्बेडकर जी की दृष्टि में  वंचितों के राजनीतिक सशक्तिकरण की अनिवार्यता*

*श्रुतम्-161* *अम्बेडकर जी की दृष्टि में  वंचितों के राजनीतिक सशक्तिकरण की अनिवार्यता* अम्बेडकर वंचितों का राजनीतिक…

*शिक्षा, रोजगार और आरक्षण के संबंध में अम्बेडकर जी का व्यापक चिन्तन*

*श्रुतम्-160* *शिक्षा, रोजगार और आरक्षण के संबंध में अम्बेडकर जी का व्यापक चिन्तन* सामाजिक व्यवस्था में…

*जहां सभी क्षेत्रों में अन्याय, शोषण एवं उत्पीड़न होता है वहीं सामाजिक न्याय की धारणा जन्म लेती है।* – डाॅ. अम्बेडकर

*श्रुतम्-159* *जहां सभी क्षेत्रों में अन्याय, शोषण एवं उत्पीड़न होता है  वहीं सामाजिक न्याय की धारणा…

*भारत के सर्वांगीण विकास और राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय हिंदू समाज का सुधार एवं आत्म-उद्घार है*

*श्रुतम्-158* *भारत के सर्वांगीण विकास और राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय हिंदू समाज का…

*डाॅक्टर अम्बेडकर की दृष्टि में समरस समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है*

*श्रुतम्-157* *डाॅक्टर अम्बेडकर की दृष्टि में समरस समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है*…

भारतरत्न बाबासाहेब  डॉ भीमराव अम्बेडकर और उनकी राष्ट्र- दृष्टि

*श्रुतम्-156* *भाग-1* *भारतरत्न बाबासाहेब  डॉ भीमराव अम्बेडकर और उनकी राष्ट्र- दृष्टि’* डॉ. अम्बेडकर को भारत का…

 *आज मैं अपनी आंखों से पूरा भारत एक साथ देख रहा हूँ।*

*श्रुतम्-155* *आज मैं अपनी आंखों से पूरा भारत एक साथ देख रहा हूँ।* पूजनीय डॉक्टर जी…