बाल संस्कार

 द्वादश ज्योतिर्लिंग-घृष्णेश्वर/घुश्मेश्वर

श्रुतम्-304

 द्वादश ज्योतिर्लिंग

 घृष्णेश्वर/घुश्मेश्वर

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग *महाराष्ट्र* में सह्याद्रि पर्वतमालाओं के मध्य *औरंगाबाद के पास वेरुल गांव* में स्थित है।

द्वादश ज्योतिर्लिंगस्तोत्रं के अनुसार इस बारहवें और अंतिम ज्योतिर्लिंग को घुश्मेश्वर, घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहा जाता है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा, बारह ज्योतिर्लिंग यात्रा को पूर्णता प्रदान करती हैं।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के पश्चात् निःसंतान को संतान का सुख प्राप्त होता है और भक्तों के हर प्रकार के रोग, दुख दूर हो जाते है। विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफायें घृष्णेश्वर मंदिर से मात्र 500 मीटर की दूरी स्थित है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का निर्माण 13 वीं शताब्दी से भी पहले किया गया था। 13 वीं और 14 वीं शताब्दी के मध्य मुगलों ने इस मंदिर पर आक्रमण किया और मंदिर को भारी हानि पहुचाई।

इसके बाद 16 वीं शताब्दी में *छत्रपति शिवाजी महाराज के दादा मालोजी भोसले* ने इस मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था। 1680 और 1707 के मध्य मुगल सेना ने घृष्णेश्वर मंदिर पर कई हमले किए, जिससे फिर मंदिर क्षतिग्रस्त हुआ। 18 वीं शताब्दी में *इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होलकर* में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का पुनर्निर्माण करवाया।

दक्षिण भारतीय शैली में बना घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर 44,400 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे लाल रंग के पत्थरों से बनाया गया है। घृष्णेश्वर मंदिर में तीन द्वार बने है, एक महाद्वार और दो पक्षद्वार। सभा मंड़प 24 पत्थर के स्तंभों पर बना है, इन स्तंभों पर जटिल नक्काशी की गई है। मंदिर के परिसर में लाल पत्थर की दीवारें पर भगवान विष्णु के दशावतार के दृश्य  को दर्शाया गया है और कई देवी देवताओं की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।

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