बाल संस्कार

 द्वादश ज्योतिर्लिंग-रामेश्वरम्

*श्रुतम्-303*
 द्वादश ज्योतिर्लिंग
 रामेश्वरम्

रामेश्वरम् हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है।

यह *तमिलनाडु के रामनाथपुरम् जिले* में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के *चार धामों में से एक* है।

इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह/ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है।

भारत के उत्तर मे काशी की जो मान्यता है, वही दक्षिण में रामेश्वरम् की है।

रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ *एक सुंदर शंख आकार द्वीप* है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, परन्तु बाद में सागर की लहरों ने इस मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया।

यहां भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व पत्थरों के *सेतु का निर्माण* करवाया था, जिसपर चढ़कर वानर सेना लंका पहुंची व वहां विजय पाई। बाद में राम ने विभीषण के अनुरोध पर *धनुषकोटि* नामक स्थान पर यह सेतु तोड़ दिया था। आज भी इस *३० मील (४८ कि.मी)* लंबे आदि-सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं। यहां के मंदिर के *तीसरे प्रकार का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा* है।

यह उत्तर-दक्षिणमें १९७ मी. एवं पूर्व-पश्चिम १३३ मी. है। इसके परकोटे की चौड़ाई ६ मी. तथा ऊंचाई ९ मी. है। मंदिर के प्रवेशद्वार का गोपुरम ३८.४ मी. ऊंचा है।

यह उत्तर-दक्षिणमें १९७ मी. एवं पूर्व-पश्चिम १३३ मी. है। इसके परकोटे की चौड़ाई ६ मी. तथा ऊंचाई ९ मी. है। मंदिर के प्रवेशद्वार का गोपुरम ३८.४ मी. ऊंचा है।

 

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