बाल संस्कार

RSS हमारी मदद के लिए नहीं आया होता तो हम जिंदा नहीं बचते

*श्रुतम्-208*

*RSS हमारी मदद के लिए नहीं आया होता तो हम जिंदा नहीं बचते*

अगस्त 1979 में गुजरात में जो बांध टूट जाने से मोरबी में प्रलय का ऐसा दृश्य उपस्थित हो गया था जो बांध दुर्घटनाओं के इतिहास में एक सर्वाधिक भयंकर दुर्घटना थी।  तुरंत ही संघ ने मोरवी सहायता समिति का गठन किया। सबसे पहले राजकोट के स्वयंसेवक मोर भी पहुंचे। तत्काल 10 सहायता केंद्र खोले गए और 1200 परिवारों तथा 14000 लोगों को सहायता प्रदान की गई। आंध्र की भांति यहां भी समूचे गुजरात से संघ  स्वयंसेवकों ने शवों को उठाने और उनका दहा संस्कार करने का घिनौना समझा जाने वाला कठोर एवं दारुण दायित्व अपने कंधों पर लिया। मोरवी नगर पालिका के अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा था- *”यदि संघ स्वयंसेवक यह कार्य न करते तो मोरवी एक अन्य दुर्दांत महामारी अर्थात हैजे का शिकार हो जाता।”* अनेक स्थानों से आए सैंकड़ों  स्वयंसेवकों को राजकोट में ठहराया गया था।  प्रातः काल वहां से चलते समय वे मध्यान्ह भोजन के लिए अपनी जेबों में मूंगफली ले जाते और दिन भर अनगिनत कार्य करके रात को राजकोट लौट आते हैं।  उन दिनों मुसलमानों के रमजान के रोजे चल रहे थे। राजकोट के एक सहायता शिविर में लगभग 4000 मुसलमान थे। उन्हें अपने मजहबी कार्य करने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई। उनमें 1 दिन भी बाधा नहीं पड़ी। ब्रह्म मुहूर्त में ही खाना पका लिया जाता था और सूर्योदय से पूर्व ही खिला दिया जाता था। शिविर के भीतर ऐसे ही प्रकल्प जैनियों और अन्य हिंदुओं के कुछ वर्गों के लिए भी किए गए। जैनियों पर्युषण किया और सनातनियों ने श्रावण पूजा। बाद में जब श्री अटल बिहारी वाजपेयी उन शिविरों को देखने गए तो कुछ मुसलमानों ने उनको बताया कि *”यदि RSS हमारी मदद के लिए नहीं आया होता तो हम जिंदा नहीं बचते।”*

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *