बाल संस्कार

 द्वादश ज्योतिर्लिंग- श्री नागेश्वर

श्रुतम्-302

 द्वादश ज्योतिर्लिंग- श्री नागेश्वर

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग नागों के ईश्वर रूप में भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह *गुजरात के द्वारका धाम से 17 किलोमीटर बाहरी क्षेत्र* की ओर स्थित है।

रुद्र संहिता* में इनको दारुकावने नागेशं कहा गया है।

नागेश्वर शब्द का अर्थ है, नागों के भगवान। नाग जो कि हमेशा भगवान शिव की गर्दन के चारों ओर कुंडली मारे पाए जाते है। इसलिए यह मंदिर विष और विष से संबंधित रोगों से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध है। नागेश्वर शिवलिंग गोल काले पत्थर वाले द्वारका शिला से त्रि-मुखी रूद्राक्ष रूप में स्थापित है, शिवलिंग के साथ देवी पार्वती की भी उपासना की जा सकती है। मंदिर का पौराणिक महत्व माना जाता है कि भगवान कृष्ण रुद्राभिषेक के द्वारा भगवान शिव की आराधना करते थे। और बाद में आदि शंकराचार्य ने कलिका पीठ*  पर अपने पश्चिमी मठ की स्थापना की।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग खूबसूरत मंदिरों में से एक है और मंदिर परिसर के पास ही भगवान शिव की 80 फीट की ऊंचाई वाली मूर्ति स्थापित की गई है। यह मूर्ति पद्मासन मुद्रा में बैठे हुए शिव की है। इस मूर्ति के पास पक्षियों का झुंड हमेशा आपको घूमते हुए दिखाई देगा, जो इसकी प्राकृतिक खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देता है।

यह स्थान गोमती द्वारका से बेट द्वारका जाते रास्ते में ही स्थित है।

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